विक्रमशिला अभयारण्य में गंगा डॉल्फिन पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, जानिए पूरी सच्चाई

MyBhagalpur Team5 October 20262 min read0 viewsBihar
विक्रमशिला अभयारण्य में गंगा डॉल्फिन पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, जानिए पूरी सच्चाई

बिहार के विक्रमशिला अभयारण्य में गंगा डॉल्फिन के सामने जीने का बड़ा संकट बना हुआ है। मार्च 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक मछुआरों के जाल में फंसकर हर साल लगभग 8 से 9 डॉल्फिन की मौत हो जाती है। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि डॉल्फिन के तेल का इस्तेमाल अवैध रूप से मछली पकड़ने के चारे के रूप में और गठिया के इलाज के लिए गलत तरीके से किया जाता है। इसके अलावा बांधों, बैराजों, पानी के कम बहाव और अधिक गाद जमा होने से उनका आवास खंडित हो रहा है। 5 मार्च 2022 को नवगछिया के इस्माइलपुर दुर्गा मंदिर के पास एक मादा डॉल्फिन मरी हुई मिली थी जिसके मुंह में प्लास्टिक की रस्सी और बांस की खूंटी बंधी थी।

विक्रमशिला अभयारण्य और डॉल्फिन दर्शन

विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य भागलपुर में सुल्तानगंज जहांगीरा से Bateshwar Sthan तक 71 किलोमीटर में फैला है। हालांकि सरकार 5 अक्टूबर को राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस मनाती है, लेकिन जानकारों का कहना है कि वहां देखने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। वन विभाग ने इस जीव का नाम 'मुस्कान' रखा है। स्थानीय लोग और पर्यटक मणिक सरकार घाट, कहलगांव के तीन पहाड़ी और सुल्तानगंज के तटों पर इन्हें देखने के लिए इकट्ठा होते हैं।

डॉल्फिन की गिनती और आंकड़े

डॉल्फिन की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे हैं। 27 सालों में इनकी संख्या 95 से बढ़कर 215 होने की बात कही गई है, वहीं गंगा प्रहरी के सदस्य मुकेश चौधरी का अनुमान है कि सुल्तानगंज और कहलगांव के बीच करीब 200 डॉल्फिन हैं। मुकेश चौधरी ने नर डॉल्फिन की बढ़ती संख्या और नावों के ट्रैफिक से डॉल्फिन के नेविगेशन पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई है। भागलपुर के डीएफओ आशुतोष राज ने बताया कि 2021 के सर्वे में 207 डॉल्फिन दर्ज की गईं, जो 2018 में 188 थीं। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा 2024 की शुरुआत में किया गया सर्वे अभी पूरा होना बाकी है। अभयारण्य के विकास की योजनाओं में सुल्तानगंज में नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, वॉच टॉवर और बोटिंग की सुविधा शामिल है। 5 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ ने आठ राज्यों की 28 नदियों में कुल 6,327 डॉल्फिन का अनुमान लगाया है, जिसमें बिहार की छह नदियों में लगभग 2,220 डॉल्फिन हैं। शोधार्थी जय कुमार जय ने पर्यटन और संरक्षण जागरूकता बढ़ाने के लिए डॉल्फिन देखने की पक्की जगह बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।

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