भागलपुर का ऐतिहासिक चंपानगर बदहाल, जानिए बिहुला-विषहरी की कहानी

MyBhagalpur Team29 August 20261 min read22 viewsBihar
भागलपुर का ऐतिहासिक चंपानगर बदहाल, जानिए बिहुला-विषहरी की कहानी

भागलपुर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है, जहां ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी और यह माता बिहुला-विषहरी की कथा का उद्गम स्थल भी है। इस क्षेत्र में चंपानगर अपने सिल्क के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और सती बिहुला तथा चांदो सौदागर यानी चंद्रधर सौदागर की गाथा से जुड़ा हुआ है।

शोध विशेषज्ञ हेमंत कुमार बताते हैं कि यह कथा चंद्रधर सौदागर और उनके सबसे छोटे बेटे बाला लखेंद्र के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका विवाह सती बिहुला से हुआ था। कथा के अनुसार, चंद्रधर सौदागर द्वारा मां विषहरी की पूजा करने से इनकार करने के बाद, उनके छह बड़े बेटे त्रिवेणी गंगा घाट पर डूब गए थे। बाला लखेंद्र को सांप के काटने से होने वाली मौत की भविष्यवाणी से बचाने के लिए एक लोहे का घर बनाया गया था।

महाशय ड्योढ़ी के पास है महल

वह महल जहां ये घटनाएं हुईं, महाशय ड्योढ़ी के पास स्थित है और माना जाता है कि यह चंद्रधर सौदागर तथा उनके सैनिकों का निवास स्थान था। कभी 10 मंजिला यह इमारत अब खंडहर बन चुकी है और केवल दो मंजिलें ही बची हैं; ऐसा माना जाता है कि आठ मंजिलें जमीन के अंदर धंस चुकी हैं। आज इस स्थल पर मां विषहरी की एक पवित्र 'पिंडी' है जिसकी पूजा लगातार की जाती है, हालांकि यह संरचना खुद उपेक्षा की स्थिति में है।

पर्यटन स्थल बनाने की मांग

हेमंत कुमार ने सुझाव दिया है कि अगर सरकार इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए हस्तक्षेप करे, तो चंपानगर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है।

MyBhagalpur की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel
Share:

Comments

Leave a comment