जमुई: स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने लगाया दिवाली और छठ मेला
जमुई प्रशासन ने स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए दिवाली और छठ मेला लगाया है। धनतेरस पर होगा शुभारंभ।

त्योहारों के इस मौसम में जमुई जिला प्रशासन ने स्थानीय हुनर और पारंपरिक उत्पादों को बाजार दिलाने के लिए एक शानदार पहल की है। जिले के श्री कृष्ण सिंह मेमोरियल स्टेडियम परिसर में एक विशेष एक-दिवसीय मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला न केवल दिवाली और छठ पूजा की तैयारियों को खास बनाएगा, बल्कि हमारे स्थानीय शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया भी बनेगा। इस मेले का औपचारिक उद्घाटन धनतेरस के मौके पर दोपहर 3:00 बजे जिला मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाएगा।
इस मेले की सबसे खास बात यह है कि यहाँ जीविका दीदियों, ग्रामीण कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों के स्टॉल लगाए गए हैं। यहाँ आने वाले लोग पारंपरिक सजावटी सामानों से लेकर क्षेत्रीय व्यंजनों का लुत्फ उठा सकेंगे। मेले में कुछ ऐसे उत्पाद भी होंगे जो सीधे दिल को छू लेंगे, जैसे जमुई ऑब्जर्वेशन होम के बच्चों द्वारा बनाई गई हाथ से तैयार मोमबत्तियां। प्रशासन का मानना है कि इन बच्चों के उत्पादों की बिक्री से उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
स्थानीय उत्पादों का संगम और 'वोकल फॉर लोकल' का संदेश
मेले में जमुई की क्षेत्रीय पहचान को भी प्रमुखता दी गई है। यहाँ तमकुलिया के मशहूर हाथ से बने सूप और डौरों (बांस की टोकरी) की प्रदर्शनी होगी, जो छठ पूजा के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। साथ ही, घनबेरिया के प्रसिद्ध पेड़े और अन्य मिठाइयां भी यहाँ उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, त्योहारों से जुड़े विभिन्न हस्तशिल्प और होम डेकोर के सामान भी बिक्री के लिए रखे जाएंगे।
जिला प्रशासन की यह पूरी कोशिश 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को जमीनी स्तर पर उतारने की है, ताकि स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों की आजीविका को सहारा मिल सके। प्रशासन ने जिले के सभी निवासियों से अपील की है कि वे धनतेरस, दिवाली और छठ की खरीदारी के लिए इस मेले में आएं और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। साथ ही, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और मीडिया से भी अनुरोध किया गया है कि वे इस पहल का प्रचार करें ताकि अधिक से अधिक लोग इन मेहनतकश कारीगरों की मदद कर सकें।