जमुई के प्रतापपुर गांव में साल 2003 में हुए दो भाइयों के चर्चित दोहरे हत्याकांड में पुलिस की सख्ती के बाद नामजद आरोपी महेश यादव ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। पुलिस लगातार फरार आरोपियों की तलाश में जुदी हुई थी और उनके घरों पर ढोल-नगाड़े बजाकर इश्तेहार भी चिपकाए गए थे। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कोर्ट ने महेश यादव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
साल 2003 में प्रतापपुर गांव में डीपी यादव और उनके भाई पुना यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में टाउन थाने में
कांड संख्या 44/2003 दर्ज की गई थी। पुलिस उन आरोपियों की तलाश में जुटी थी जो सालों से फरार चल रहे थे। कोर्ट में आत्मसमर्पण करने से एक हफ्ता पहले पुलिस ने आरोपियों को चेतावनी देते हुए सार्वजनिक नोटिस जारी किया था। इस दोहरे हत्याकांड में इससे पहले किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी या सजा की जानकारी पुलिस या आम जनता को नहीं मिल पाई थी।
यह कार्रवाई मधवा कांड के बाद अलग से सामने आई है, जिसमें मुख्य आरोपी के पिता और नामजद आरोपी गौरी यादव को
22 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस दोहरे हत्याकांड का मामला मधवा कांड के बाद एक बार फिर से चर्चा में आया और पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी।