भागलपुर JLNMCH में करोड़ों की मशीनें धूल फांक रही हैं और मरीजों को प्राइवेट में देने पड़ रहे हैं महंगे पैसे

MyBhagalpur Team26 September 20262 min read1 viewHealth
भागलपुर JLNMCH में करोड़ों की मशीनें धूल फांक रही हैं और मरीजों को प्राइवेट में देने पड़ रहे हैं महंगे पैसे

भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से मंगाई गई आधुनिक मेडिकल मशीनें इस्तेमाल नहीं हो रही हैं। इसके कारण मरीजों को बाहर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं। - सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अगस्त में आई कैथ लैब की मशीनें रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास रखी हैं। - JLNMCH के एमसीएच भवन में 20 बेड का एसएनसीयू स्टाफ की कमी से चालू नहीं है। - कैथ लैब चालू न होने से मरीजों को एंजियोप्लास्टी के लिए एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कैथ लैब की मशीनें बेकार

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दिल के मरीजों के लिए आई हाई-टेक कैथ लैब की मशीनें अगस्त में ही आ गई थीं जो अभी अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास रखी हुई हैं। कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में आने वाले करीब 10 प्रतिशत मरीजों को एंजियोग्राफी की जरूरत होती है। शनिवार को ओपीडी में 150 से ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ। कैथ लैब की मशीनें इंस्टॉल न होने के कारण इन मरीजों को प्राइवेट जगहों पर जाना पड़ रहा है जहाँ दिल की ब्लॉकेज ठीक करने वाली एंजियोप्लास्टी के लिए उन्हें 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। वर्तमान में मरीज ऐसी जांचों के लिए 8,000 से 15,000 रुपये दे रहे हैं जो रियायती दरों पर मिलनी चाहिए थीं। कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमित शंकर ने बताया कि ओपीडी में ईसीजी, टीएमटी और इको जांच होती है जो 90 प्रतिशत मरीजों के लिए काफी है लेकिन कैथ लैब की फिटिंग अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि कैनन कंपनी के इंजीनियरों के आने की उम्मीद है और इस प्रक्रिया में चार से पांच महीने लगेंगे। अस्पताल प्रशासन ने कंपनी को सेटअप शुरू करने के लिए औपचारिक निर्देश दे दिया है।

एसएनसीयू चालू होने से नवजात शिशुओं को मिलेगी राहत

JLNMCH के एमसीएच भवन में 20 बेड का स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी एसएनसीयू स्टाफ की कमी की वजह से चालू नहीं है जिससे गंभीर नवजात बच्चों के लिए जगह की कमी हो रही है। फिलहाल बाल रोग विभाग में 36 बेड का नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट चल रहा है। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि एमसीएच भवन का एसएनसीयू खुलने से जरूरी अतिरिक्त क्षमता मिल जाएगी। बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने बताया कि तकनीकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। विभाग ने कम से कम 10 अतिरिक्त स्टाफ सदस्यों की मांग की है। अस्पताल प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि राज्य सरकार द्वारा कर्मियों की तैनाती के बाद फरवरी तक स्टाफ मिल जाएगा। एसएनसीयू का निर्माण पूर्व विभाग प्रमुख डॉ. के.के. सिन्हा के कार्यकाल में राज्य सरकार की मदद से हुआ था हालांकि इस पर हुए कुल खर्च की जानकारी सामने नहीं आई है।

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