भागलपुर के जेएलएनएमसीएच यानी मायागंज अस्पताल में गर्भवती महिला प्रीति मिश्रा की मौत के मामले में प्रशासनिक जांच तेज हो गई है। इस घटना में मां और बच्चे दोनों की जान चली गई थी।
- प्रीति मिश्रा को 26 सितंबर को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती कराया गया था।
- इलाज के दौरान 27 सितंबर को उनकी मौत हो गई।
- मृतका के ससुर डॉ. गोविंद जी तिवारी ने उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के लिए लिखित आवेदन दिया है।
- परिजनों ने वरिष्ठ डॉक्टरों पर समय पर इलाज न करने का आरोप लगाया है।
अस्पताल के अधीक्षक ने 8 अक्टूबर को स्त्री एवं प्रसूति विभाग की विभागाध्यक्ष को कड़ा पत्र जारी किया था। अधीक्षक ने 24 घंटे के भीतर बिंदुवार विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
अधीक्षक ने सभी ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों के नाम और ड्यूटी रोस्टर की मांग की। इसके अलावा नर्सिंग नोट्स, ट्रीटमेंट चार्ट, दवा लॉग, वाइटल मॉनिटरिंग चार्ट और सभी पैथोलॉजिकल टेस्ट रिपोर्ट भी मांगे गए।
मुख्य रूप से यह सवाल पूछा गया कि मरीज की हालत बिगड़ने पर इमरजेंसी सर्जरी क्यों नहीं की गई और क्या वरिष्ठ डॉक्टरों को सूचना दी गई थी।तय किया गया 24 घंटे का समय चार दिन पहले ही बीत चुका है, लेकिन विभाग ने अभी तक रिपोर्ट जमा नहीं की है।
विभाग की अध्यक्ष डॉ. अनुपमा सिन्हा ने बताया कि यूनिट के प्रभारी डॉक्टर के प्रशिक्षण पर बाहर होने के कारण देरी हुई है। उनके लौटने पर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है कि यह देरी लापरवाह स्टाफ को बचाने की साजिश हो सकती है। उनका कहना है कि वार्ड का सीसीटीवी फुटेज सच्चाई सामने लाने के लिए सबसे अहम सबूत है।