कहलगांव में आधुनिक मत्स्य पालन कार्यशाला, मछुआरों को मिले आगे बढ़ने के खास गुर

MyBhagalpur Team7 September 20262 min read38 viewsDevelopment and good news
कहलगांव में आधुनिक मत्स्य पालन कार्यशाला, मछुआरों को मिले आगे बढ़ने के खास गुर

भागलपुर के कहलगांव स्थित मंडपम हॉल में सोमवार को आधुनिक मत्स्य पालन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन सामाजिक संस्था परिधि ने जल श्रमिक संघ और गंगा मुक्ति आंदोलन से जुड़े मछुआरों के सहयोग से किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नदियों पर आश्रित पारंपरिक मछुआरों को आजीविका के नए और आधुनिक तौर-तरीकों से जोड़ना था।

  • कहलगांव के मंडपम हॉल में आधुनिक मत्स्य पालन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
  • पारंपरिक मछुआरों को ‘मछली पालने वाला’ बनाने की अनोखी पहल की गई।
  • नदी में की जाने वाली आधुनिक तकनीक ‘पिंजरा प्रणाली’ और ‘झांग विधि’ की दी गई जानकारी।
  • मछुआरों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछकर और अपने पुराने अनुभव साझा कर कार्यक्रम को बनाया संवादात्मक।

मछली पकड़ने वाले से मछली पालने वाला बनाने की पहल

कार्यशाला की भूमिका रखते हुए परिधि के निदेशक उदय ने कहा कि आज नदियों में मछलियों की संख्या और मात्रा लगातार घट रही है। ऐसे में नदियों में निःशुल्क शिकारमाही का अधिकार मिलने के बाद भी मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि परिधि संस्था का लक्ष्य मछली पकड़ने वाले पारंपरिक मछुआरों को अब कुशल ‘मछली पालने वाला’ बनाना है
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आधुनिक तकनीक और पिंजरा प्रणाली की जानकारी

कार्यशाला में जल जीविका संस्था से आए मुख्य संसाधन व्यक्ति वर्तिका प्रिय ने मछुआरों को नदी में ही की जाने वाली आधुनिक तकनीकों—‘पिंजरा प्रणाली’ तथा ‘झांग विधि’ के बारे में विस्तार से समझाया। वर्तिका प्रिय ने बताया कि यह विधि बेहद आसान और सस्ती है। इसमें नदी के किनारे बांस और जाल के सहारे एक बॉक्स या गोल घेरा बनाया जाता है। इसमें ऊपर से मछलियां और खाना डाला जाता है। नदी के प्राकृतिक वातावरण के कारण मछलियों को स्वाभाविक भोजन मिल जाता है, जिससे बाहरी चारे पर खर्च कम होता है।

विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों द्वारा अनुभव साझा

बृजेश ने मत्स्य पालन के लिए पानी की गुणवत्ता, त्रिस्तरीय मत्स्य खेती, पानी में घुले ऑक्सीजन की मात्रा और मिट्टी के महत्व जैसी तकनीकी व विशेषज्ञतापूर्ण जानकारियां मछुआरों के साथ साझा कीं। वहीं, स्थानीय सफल मत्स्य किसान कुंज बिहारी ने अपने व्यावहारिक अनुभव बांटते हुए ईंट-भट्टों के कारण बने गड्ढों को लीज पर लेकर मछली पालन करने के गुर सिखाए। उन्होंने सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की जानकारी देते हुए विशेष रूप से महिलाओं को इन सरकारी योजनाओं से जोड़ने की वकालत की।

आगे भी जारी रहेगा जागरूकता अभियान

कार्यक्रम समन्वयक राहुल ने बताया कि सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी पहले ही गांवों में वितरित की जा चुकी है और मछुआरों को जागरूक करने का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व मक्खातकिया में भी ऐसी ही एक सफल कार्यशाला आयोजित की जा चुकी है। कार्यशाला के दौरान उपस्थित मछुआरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुनील सहनी, शुकदेव सहनी, राजू सहनी और बलराज सहनी ने विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं और प्रश्नों के उत्तर जानकर कार्यशाला को बेहद जीवंत और संवादात्मक बना दिया। इस अवसर पर सुनील सहनी, संजय सहनी, संतोष सहनी, अविनाश सहनी, बलराज सहनी, श्रवन सहनी, राजू सहनी और अर्जुन सहनी ने भी मछली पालन से जुड़े अपने पुराने अनुभवों को मंच पर साझा किया।

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