खगड़िया में किसानों के लिए खास कार्यशाला, खरीफ फसल और मार्केटिंग पर बड़ी बात

MyBhagalpur Team10 October 20262 min read0 viewsDevelopment and good news
खगड़िया में किसानों के लिए खास कार्यशाला, खरीफ फसल और मार्केटिंग पर बड़ी बात

खगड़िया में कृषि विभाग की ओर से खरीफ फसलों के उत्पादन, भंडारण और मार्केटिंग को लेकर एक किसान कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शनिवार को बेलदौर कृषि कार्यालय सभागार में आयोजित हुआ। इस आयोजन की शुरुआत प्रखंड कृषि पदाधिकारी डॉ. प्रभात रंजन ने दीप जलाकर की।

  • धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, मूंगफली और अरहर की वैज्ञानिक खेती पर जोर दिया गया
  • प्रमाणित और कम समय में तैयार होने वाली अधिक उपज वाली किस्में चुनने की सलाह दी गई
  • सरकारी खरीद केंद्रों या ई-नाम पोर्टल के जरिए फसल बेचने की जानकारी दी गई

वैज्ञानिक खेती और पैदावार बढ़ाने के टिप्स

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. प्रभात रंजन ने कहा कि धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, मूंगफली और अरहर जैसी फसलों का वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन, भंडारण और मार्केटिंग करना किसानों की आय बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि खरीफ फसलों की बुवाई आमतौर पर जून और जुलाई में मानसून के आने पर होती है और कटाई सितंबर तथा अक्टूबर के आसपास की जाती है। किसानों को सलाह दी गई कि वे प्रमाणित, कम अवधि की अधिक उपज देने वाली किस्मों का चयन करें, गहरी जुताई करें और उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। उन्होंने मिट्टी की जांच के आधार पर यूरिया और डीएपी जैसे जैविक और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल की भी सिफारिश की। समय पर निराई-गुड़ाई, कीट और रोग प्रबंधन पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया।

भंडारण और लोन की सुविधा

फसल कटाई के बाद भंडारण को लेकर अधिकारियों ने अनाज को पूरी तरह से सुरक्षित नमी स्तर तक सुखाने के महत्व पर जोर दिया। अनाज को नमी रोधी जूट के थैलों, धातु के डिब्बों, आधुनिक साइलो या वैज्ञानिक गोदामों में संग्रहित किया जाना चाहिए, जिसमें कीड़ों से बचाव के लिए नीम की पत्तियों या स्वीकृत कीटनाशकों का उपयोग किया जाए। किसानों को क्रेडिट सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई, जिसमें बताया गया कि वैज्ञानिक गोदामों में उपज का भंडारण करने से रसीद मिलती है, जिसका उपयोग राष्ट्रीयकृत बैंकों से 75 से 80 प्रतिशत तक ऋण प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।

बिक्री और बीज उत्पादन की जानकारी

प्रतिभागियों को बिचौलियों से बचने और सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ उठाने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों, कृषि उपज बाजार समितियों या ई-नाम पोर्टल के माध्यम से फसल बेचने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बीज उत्पादन पर भी मार्गदर्शन दिया गया, जिसमें विशेष रूप से धान के लिए पहले उपयोग किए गए खेतों में बीज न लगाने की सलाह दी गई। इस कार्यक्रम में कृषि समन्वयक आनंद कुमार सिंह, संजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार और अनिल कुमार शामिल हुए। इसके अलावा ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक रोशन कुमार, कृषि सलाहकार मिथिलेश कुमार, राज कपूर सिंह, माधुरी कुमारी, संजय राम, दिनेश पंडित, चंदन कुमार, मुकेश कुमार, अनिल कुमार और उमेश कुमार, लेखाकार अजय कुमार तथा दर्जनों स्थानीय किसान मौजूद रहे।

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