भागलपुर के बरारी स्थित बिहार बाल भवन किलकारी परिसर में शुक्रवार से तीन दिवसीय राज्यस्तरीय विजुअल आर्ट यानी दृश्य कला प्रशिक्षण कार्यशाला की शुरुआत हुई है। यह आयोजन 25 से 27 सितंबर तक चल रहा है, जिसका उद्देश्य बिहार के सभी नौ प्रमंडलों के कला प्रशिक्षकों के कौशल को निखारना है ताकि वे राज्यभर के बच्चों की रचनात्मकता को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकें।
- बिहार बाल भवन किलकारी परिसर बरारी भागलपुर में तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू।
- 25 से 27 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में सभी नौ प्रमंडलों के प्रशिक्षक ले रहे हैं हिस्सा।
- चित्रकला, मूर्तिकला और हस्तशिल्प के आधुनिक तरीकों की दी जा रही है जानकारी।
विजुअल आर्ट विशेषज्ञ सीताराम और राज्य मुख्यालय से कार्यक्रम पदाधिकारी सह प्रभारी अनीता ठाकुर ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। प्रमंडलीय कार्यक्रम समन्वयक रवि भूषण मुकुल, साहिल राज और सुधीर कुमार भी प्रशिक्षण सत्रों का संचालन कर रहे हैं। पेंटिंग, मूर्तिकला और हस्तशिल्प में विशेषज्ञता रखने वाले प्रशिक्षक कला शिक्षा के आधुनिक, वैज्ञानिक तरीकों को सीखने के लिए इसमें भाग ले रहे हैं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कला बच्चों की मानसिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। पाठ्यक्रम प्रशिक्षकों को यह सिखाने पर केंद्रित है कि बच्चों की उम्र और समझ के अनुसार लाइनों, आकृतियों, प्रतीकों और बिंदुओं जैसे तकनीकी अवधारणाओं को सरल और आकर्षक तरीके से कैसे पेश किया जाए। व्यावहारिक सत्रों में उचित पेंसिल हैंडलिंग, शेडिंग तकनीकों और रंगों के संतुलित व रचनात्मक अनुप्रयोग पर मास्टरक्लास शामिल थे, जिन्हें खेल-खेल के माध्यम से सिखाने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता प्रदान करना है, जिसे वे अपने-अपने प्रमंडलों में लागू करेंगे। आयोजकों का मानना है कि शुरुआती कलात्मक विकास के लिए यह व्यवस्थित दृष्टिकोण पूरे बिहार में कुशल चित्रकारों, मूर्तिकारों और शिल्पकारों की एक नई पीढ़ी को तैयार करने में मदद करेगा।