किशनगंज में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार: अब ज्यादा महिलाएं कर रही हैं अस्पताल में डिलीवरी

किशनगंज जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में काफी प्रगति हुई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS)-6 के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अस्पताल में होने वाली डिलीवरी का प्रतिशत बढ़ गया है।
- अस्पताल में डिलीवरी (Institutional Deliveries): 54.6% से बढ़कर 67.1% हो गई है।
- सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी: 41.5% से बढ़कर 49.6% हो गई है।
- कुशल स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा डिलीवरी: 64.9% से बढ़कर 70.1% हो गई है।
- प्रसव पूर्व जांच (Antenatal Care): पहली तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 37.6% से बढ़कर 62.2% हो गई है।
- प्रसव पूर्व देखभाल की कुल दर: 59.2% से बढ़कर 92.7% हो गई है।
- कम से कम चार जांचें: 17.1% से बढ़कर 27.6% हो गई है।
Sadar Hospital के आंकड़े
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सदर अस्पताल में 7,067 सामान्य प्रसव (Normal Deliveries) और 167 सफल सिजेरियन ऑपरेशन हुए।
महीनेवार सामान्य प्रसव के आंकड़े इस प्रकार हैं: अप्रैल 2025 में 415, अक्टूबर में 795, नवंबर में 693, दिसंबर में 663, जनवरी 2026 में 683, फरवरी में 624 और मार्च में 645।
सभी 167 सिजेरियन प्रसव डॉ. शबनम यास्मीन के नेतृत्व में किए गए, जिसमें 24/7 आपातकालीन सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, ब्लड बैंक और SNCU की सुविधा उपलब्ध थी।
मुफ्त इलाज और सुविधाएँ
गरीब परिवारों के लिए मुफ्त इलाज के कार्यक्रमों के जरिए आर्थिक बाधाओं को दूर किया जा रहा है। कोचाधामन ब्लॉक की निवासी नाजिया खातून ने जिला अस्पताल में बिना किसी खर्च के सिजेरियन ऑपरेशन कराया, जिससे यह पता चलता है कि सीमित वित्तीय संसाधनों वाले परिवारों के लिए मुफ्त दवाएं, जांच और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं।
जागरूकता और गुणवत्ता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि प्रसव पूर्व देखभाल के मानकों में सुधार हुआ है। दिघलबैंक की निवासी रेखा देवी ने बताया कि बढ़ी हुई जागरूकता, बेहतर सुविधाओं और डॉक्टरों के अच्छे व्यवहार से ग्रामीण इलाकों में अस्पताल में प्रसव कराने की सोच बदली है।
सदर अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. अनवर हुसैन ने पुष्टि की कि अस्पताल का लेबर रूम 'लक्ष्य' (Lakshya) प्रमाणित है, जिससे संक्रमण नियंत्रण और गुणवत्तापूर्ण सेवा का उच्च स्तर सुनिश्चित होता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले के सभी गांवों में मातृ और नवजात शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन प्रसव देखभाल तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।