किशनगंज पुलिस ने एक बड़ी कानूनी कार्रवाई की है जहाँ रिश्वत और अवैध वसूली के बाद मवेशी से भरा ट्रक छोड़े जाने का मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर ठाकुरगंज थाने में तत्कालीन पाठामारी एसएचओ गंगा प्रसाद गुप्ता, सब-इस्पेक्टर सुनील कुमार और कांस्टेबल-ड्राइवर पवन कुमार के साथ-साथ पशु तस्करों और अन्य सहयोगियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
किशनगंज पुलिस द्वारा 11 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह घटना 17 और 18 अगस्त 2026 की दरमियानी रात को ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के एक टोल प्लाजा के पास हुई थी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने रिश्वत और अवैध वसूली कर ट्रक को छोड़ने के लिए पशु तस्करों के साथ मिलीभगत की थी।
पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने किशनगंज के एसडीपीओ-टू से इसकी जांच करवाई थी। जांच रिपोर्ट में गंगा प्रसाद गुप्ता, सुनील कुमार और पवन कुमार के खिलाफ संदिग्ध आचरण, अनुशासनहीनता, ड्यूटी में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि हुई है। इसके बाद 22 सितंबर 2026 को इन तीनों कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।
विभागीय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए 10 अक्टूबर 2026 को ठाकुरगंज थाने में मामला संख्या 296/26 दर्ज किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 127(2), 308(2), 308(5), और 3(5) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 8 जोड़ी गई हैं।
अधिकारी अभी पशु तस्करों और उनके सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रहे हैं। इस मामले की जांच किशनगंज साइबर पुलिस स्टेशन के डीएसपी और एसएचओ अविनाश कुमार को सौंपी गई है। किशनगंज पुलिस ने कहा है कि लापरवाही और भ्रष्टाचार के प्रति उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।