गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, मुस्लिम परिवार निभा रहा तीन पीढ़ियों से दुर्गा मंदिर में परंपरा

लखीसराय के नया बाजार स्थित बड़ी दुर्गा महारानी मंदिर में सांप्रदायिक सद्भाव की एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। नवरात्र में देवी दुर्गा के आगमन से लेकर मूर्ति विसर्जन तक, खगौर गांव का एक मुस्लिम परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से मंदिर में शहनाई और नगाड़ा बजा रहा है।
- खगौर पंचायत के खगौर गांव के स्वर्गीय मोहम्मद अकबाली ने शुरू की थी यह परंपरा
- उनके निधन के बाद बेटे मोहम्मद जमल और परिवार के मोहम्मद हैदर ने इसे आगे बढ़ाया
- मोहम्मद जमल के निधन के बाद तीसरी पीढ़ी के मोहम्मद नसीम और मोहम्मद सलमान ने संभाली जिम्मेदारी
कोलकाता से सीखी थी कला
नसीम और सलमान ने बताया कि उनके पूर्वजों ने कोलकाता में शहनाई और नगाड़ा बजाने की कला सीखी थी और फिर इस परंपरा को बड़ी दुर्गा मंदिर में लेकर आए। वे इस प्रथा को जारी रखना अपनी पारिवारिक विरासत को बचाना मानते हैं।
मंदिर समिति का बयान
मंदिर के सचिव मनोज कुमार और उपाध्यक्ष अनिल कुमार साहू ने बताया कि यह संगीत नवरात्र की पूजा के दौरान एक भक्तिमय माहौल बनाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह बहु-पीढ़ीगत परंपरा हिंदू-मुसलमान एकता, भाईचारे और समुदायों को जोड़ने की संस्कृति और आस्था का प्रतीक है।