भागलपुर में गांधी शांति प्रतिष्ठान के लोगों ने खानकाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादा नशीन सैयद शाह फख्रे आलम हसन से मुलाकात की।
- सज्जादा नशीन को भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला से सुसज्जित अंगवस्त्र भेंट किया गया।
- यह मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण और बौद्धिक माहौल में हुई।
- सज्जादा नशीन मक्का-मदीना की आध्यात्मिक यात्रा से लौटे हैं।
सज्जादा नशीन सैयद शाह फख्रे आलम हसन ने महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन, सत्य, अहिंसा और हिंदू-मुस्लिम एकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि
महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति या किसी विशेष कालखंड के विचारक नहीं थे, बल्कि वे हिंदुस्तान की आत्मा, भारतीय सभ्यता की नैतिक चेतना और करोड़ों देशवासियों के दिलों की धड़कन हैं। गांधीजी का व्यक्तित्व भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और धार्मिक सहिष्णुता का ऐसा प्रकाशस्तंभ है, जिसकी रोशनी आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि
आज के समय में समाज को प्रेम और राष्ट्रीय एकजुटता की सबसे ज्यादा जरूरत है। गांधीजी के विचार केवल किताबों और सभागारों तक सीमित न रहकर हमारी शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनने चाहिए।
सज्जादा नशीन ने खानकाह पीर दमड़िया शाह और राष्ट्रपिता के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए बताया कि
जब गांधीजी भागलपुर आए थे, तब उनकी मुलाकात खानकाह के बुजुर्गों—उनके परदादा हजरत सैयद शाह फख्रे आलम साहब और दादा हजरत सैयद शाह शरफे आलम साहब से हुई थी। यह संबंध स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल है। उन्होंने यह भी याद किया कि लगभग दो वर्ष पूर्व गांधीजी के प्रपौत्र तुषार गांधी भी खानकाह आए थे, जिससे यह ऐतिहासिक और आत्मीय परंपरा आज भी जीवंत है। आयोजन के सफल समापन पर सज्जादा नशीन ने गांधी शांति प्रतिष्ठान और आयोजक मंडल को बधाई दी। इस गरिमामयी मुलाकात के दौरान प्रोफेसर मनोज कुमार, तकी जावेद, डॉ. उमेश प्रसाद नीरज सज्जाद खान, डॉ. रविशंकर कुमार चौधरी, सैयद मोहम्मद काशिफ, मोहम्मद अहमद बासूदा आदि मौजूद थे।