बिहार में रोजगार की तस्वीर तेजी से बदल रही है और मोबाइल आधारित गिग इकॉनमी प्लेटफॉर्म स्थानीय स्तर पर कमाई के नए अवसर पैदा कर रहे हैं, जिससे मजदूरों का पलायन कम हो रहा है। श्रम संसाधन और प्रवासी मजदूर कल्याण विभाग के पोर्टल पर 1 सितंबर 2026 तक 11.6 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर रजिस्टर हो चुके हैं। सबसे आगे रहने वाले जिलों में पटना, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और मधुबनी शामिल हैं।
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिषेक आनंद ने अपनी पुस्तक 'राइजिंग बिहार्स टास्क-बस्ड इकॉनमी' में बताया है कि भागलपुर में लगभग 18,000 युवा पहले से ही गिग वर्क से जुड़े हुए हैं। डॉ. आनंद ने खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, हस्तशिल्प और सिलाई जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले महिला-नेतृत्व वाले छोटे व्यवसायों और स्वयं सहायता समूहों को इस डिजिटल ढांचे में जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया है। इसके अलावा, भागलपुर के प्रसिद्ध सिल्क और हथकरघा उद्योगों के डिजिटलीकरण से स्थानीय कारीगर सीधे वैश्विक बाजारों से जुड़ सकते हैं, जिससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा।
इस सेक्टर के लिए 23 जुलाई 2025 को 'बिहार प्लेटफॉर्म-बेस्ड गिग वर्कर (रजिस्ट्रेशन, सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर) एक्ट, 2025' पास किया गया था। इस कानून के तहत 60 दिनों के भीतर प्लेटफॉर्म का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है, वर्कर को यूनिक आईडी मिलती है, और महिलाओं को 90 दिन की मातृत्व अवकाश, दुर्घटना में मौत पर 4 लाख रुपये तक का मुआवजा और विकलांगता पर 2.5 लाख रुपये तक की सहायता की गारंटी मिलती है। सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से सामाजिक सुरक्षा उपाय भी लागू कर दिए हैं, जिसके तहत स्वास्थ्य और कार्यस्थल सुरक्षा लाभ पाने के लिए 90 से 120 दिन का काम अनिवार्य किया गया है।
बुनियादी ढांचे और ट्रेनिंग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने अगस्त 2026 में 'सात निश्चय-3' (2025-30) के तहत 'कौशल युवा कार्यक्रम' के लिए 430.08 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जो एआई, ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा और डिजिटल मार्केटिंग पर आधारित है। इसके अलावा, फरवरी 2026 में छोटे व्यवसायों के लिए 3,000 करोड़ रुपये की छह साल (2026-32) की योजना की घोषणा की गई, जिसमें विश्व बैंक का 70 प्रतिशत और राज्य का 30 प्रतिशत योगदान है। सरकार ने पटना में डिलीवरी पार्टर्स के लिए आधुनिक एसी लाउंज भी शुरू किए हैं और नौकरी देने वालों व नौकरी तलाशने वालों के बीच पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक एकीकृत डिजिटल रोजगार प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।