मुंगेर में आत्मा (ATMA) के सहयोग से कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा एक दिवसीय किसान शैक्षणिक भ्रमण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक तरीके से वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाने और खेती में इसके इस्तेमाल की पूरी जानकारी दी गई। किसानों को सिखाया गया कि कैसे खेती के कचरे और दूसरी जैविक चीजों से कम खर्च में बेहतरीन वर्मीकम्पोस्ट तैयार की जा सकती है।
- कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार ने जैविक खेती और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर जोर दिया।
- प्रशिक्षण में वर्मी-बेड तैयार करने से लेकर केंचुए की सही प्रजाति चुनने और खाद के इस्तेमाल तक की पूरी प्रक्रिया समझाई गई।
- आत्मा, मुंगेर के अधिकारियों ने किसानों को खेती की लागत घटाकर कमाई बढ़ाने की सलाह दी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख
डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट जैविक खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने में बहुत जरूरी भूमिका निभाता है। उन्होंने समझाया कि इसके लगातार इस्तेमाल से मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ते हैं, जिससे फसल की पैदावार अच्छी होती है। उन्होंने किसानों को स्थानीय स्तर पर मिलने वाले कृषि अवशेषों का इस्तेमाल करके वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने के लिए प्रेरित किया।
इस प्रशिक्षण में
वर्मीकम्पोस्ट बनाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई, जिसमें वर्मी-बेड की तैयारी, सही जैविक पदार्थों का चुनाव, उपयुक्त केंचुए की प्रजातियों की पहचान, नमी और तापमान का रख-रखाव, तैयार खाद की पहचान, रखने के तरीके और खेतों में सही इस्तेमाल शामिल था। विशेषज्ञों ने किसानों के कई सवालों के जवाब भी दिए।
कार्यक्रम में आत्मा, मुंगेर के अधिकारी सुखबीर कुमार और सोनू कुमार भी मौजूद थे।
उन्होंने किसानों से खेती का खर्च घटाने और अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए आधुनिक तरीकों को अपनाने की अपील की। हिस्सा लेने वाले किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा किया और अलग-अलग गतिविधियों को देखा तथा विशेषज्ञों के साथ खेती से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। भाग लेने वाले किसानों ने बताया कि
वर्मीकम्पोस्ट बनाने की तकनीक से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी और अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे।