विकसित भारत @ 2047: टीएमबीयू भागलपुर में मानव संसाधन विकास पर राष्ट्रीय सेमिनार शुरू
टीएमबीयू भागलपुर में 'विकसित भारत @ 2047' के लिए मानव संसाधन विकास पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुआ।

भागलपुर के तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMBU) में 'विकसित भारत @ 2047' के विजन को साकार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यूनिवर्सिटी के मल्टीपर्पज हॉल में बुधवार से 'समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन विकास' विषय पर दो दिवसीय बहुविषयक राष्ट्रीय सेमिनार का आगाज हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में रणनीति तैयार करना है।
इस सेमिनार का आयोजन यूनिवर्सिटी के ग्रामीण अर्थशास्त्र एवं सहकारी प्रबंधन विभाग और औद्योगिक संबंध एवं कार्मिक प्रबंधन विभाग द्वारा किया गया। इसमें कृषि-आर्थिक अनुसंधान केंद्र और एमबीए प्रोग्राम ने भी अपनी भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल से आए प्रोफेसर देबाशीष सरकार ने शिरकत की। उन्होंने 2047 तक के सफर के लिए एक विस्तृत रोडमैप पेश किया, जिसमें समयबद्ध चरणों की बात कही गई।
2047 तक के विकास का मास्टर प्लान
प्रोफेसर देबाशीष सरकार ने विकास की प्रक्रिया को चार मुख्य चरणों में विभाजित किया। उनके अनुसार, 2026 से 2031 तक का समय विश्वसनीय सूचनाओं के आधार को मजबूत करने का होगा। इसके बाद 2031 से 2035 के बीच कौशल विकास और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। 2036 से 2040 के दौरान स्थानीय उद्यमियों और वैल्यू चेन को सशक्त बनाने की योजना है, जबकि 2041 से 2047 तक का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर पैदा करना होगा।
वहीं, शिक्षाविद डॉ. राजीव कांत मिश्रा ने भागलपुर के जीआई (GI) टैग वाले उत्पादों की चर्चा करते हुए कहा कि इन्हें सही बाजार उपलब्ध कराना समय की मांग है। पूर्व कुलपति प्रोफेसर उग्र मोहन झा ने ग्रामीण समावेशी कार्यक्रमों की सफलता के लिए योजना बनाने वाली एजेंसियों और हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। क्षमेंद्र कुमार सिंह ने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे आज के समय में इंसानों को संसाधनों में बदला जा रहा है।
इस बौद्धिक चर्चा में एक्टिंग कुलपति प्रोफेसर रंजना दुबे, डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर अर्चना साह, प्रोफेसर बालकृष्ण झा, प्रोफेसर रामसेवक सिंह, प्रोफेसर सीपी सिंह, प्रोफेसर सुदाम यादव और सेमिनार संयोजक प्रोफेसर राजेश कुमार मिश्रा सहित कई दिग्गजों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अश्वजीत राठौर ने किया, जबकि सत्रों की अध्यक्षता रामसेवक सिंह और चंद्र प्रकाश सिंह ने की।