TMBU भागलपुर: विकसित भारत के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नेशनल सेमिनार शुरू
टीएमबीयू भागलपुर में विकसित भारत @ 2047 के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मानव संसाधन विकास पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

भागलपुर की तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMBU) में बुधवार से एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सेमिनार की शुरुआत हुई। 'विकसित भारत @ 2047 के लिए समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन विकास' विषय पर आधारित यह दो दिवसीय आयोजन यूनिवर्सिटी के मल्टीपर्पज हॉल में किया जा रहा है। इस सेमिनार को पीजी रूरल इकोनॉमिक्स और पीजी IRPM विभाग ने संयुक्त रूप से आयोजित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य गांवों के विकास और युवाओं के सशक्तिकरण पर चर्चा करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी कुलपति प्रोफेसर रंजना दुबे ने स्पष्ट किया कि यदि हमें 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समावेशी बनाना और मानव संसाधन का विकास करना अनिवार्य होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की असली प्रगति गांवों के विकास और वहां के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करने से ही संभव है।
विशेषज्ञों ने साझा किए ग्रामीण विकास के मंत्र
सेमिनार के मुख्य वक्ता, विश्व-भारती यूनिवर्सिटी (शांतिनिकेतन) के प्रोफेसर देबाशीष सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि आजादी के समय जीडीपी में कृषि का योगदान 50 प्रतिशत था, जो अब गिरकर लगभग 15 प्रतिशत रह गया है, जबकि ग्रामीण कार्यबल की भागीदारी बढ़कर करीब 67 प्रतिशत हो गई है।
वहीं, शिक्षाविद् डॉ. राजीव कांत मिश्रा ने भागलपुर की खास पहचान वाले उत्पादों जैसे कतरनी चूड़ा, जरदालु आम और टसर सिल्क (GI टैग उत्पाद) के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे:
- प्रोफेसर क्षेमेंद्र कुमार सिंह ने मानव को संसाधन में बदलने की प्रक्रिया पर बात की।
- डॉ. उग्रामोहन झा ने ग्रामीण समावेशी कार्यक्रमों के लिए योजनाकारों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की वकालत की।
- प्रोफेसर रामसेवक सिंह ने मानव संसाधन विकास के लिए मांग-आधारित प्रशिक्षण (Demand-based training) को जरूरी बताया।
इस अवसर पर प्रोफेसर निर्मला कुमारी ने अतिथियों का स्वागत किया और डॉ. अश्वजीत राठौर ने विषय का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर राजेश कुमार मिश्रा ने किया और धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. रंजन कुमार सिन्हा ने पेश किया। सेमिनार के तकनीकी सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए, जिसमें डॉ. रविशंकर कुमार चौधरी, डॉ. नमन कुमार और डॉ. अभिषेक कुमार सहित कई शिक्षक और छात्र शामिल रहे।