नवगछिया में गंगा-कोसी का जलस्तर घटा, तटबंधों पर अब भी खतरा

भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल से राहत भरी खबर सामने आई है जहाँ गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल कार्यालय के अनुसार पिछले 24 घंटों में नदियों के पानी में आंशिक कमी आई है लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।
- नवगछिया में गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में लगातार गिरावट जारी है।
- इस्माईलपुर-बिंदटोली में गंगा खतरे के निशान से महज 3 सेंटीमीटर नीचे है।
- राघोपुर में गंगा का जलस्तर चेतावनी के स्तर से 10 सेंटीमीटर ऊपर है।
- मदरौनी और जेबी चोरहर में कोसी के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है।
- तटबंधों पर सुरक्षा के लिए विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
जलस्तर घटने से राहत
क्षेत्र में तबाही मचाने वाली गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में बुधवार को भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल कार्यालय, नवगछिया से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 24 घंटों में नदियों के जलस्तर में आंशिक कमी आई है। हालांकि, जलस्तर घटने के बावजूद खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि कई संवेदनशील स्थानों पर नदियों का पानी अब भी तटबंधों के निचले हिस्से को छू रहा है, जिससे कटाव और रिसाव का खतरा बना हुआ है।
इस्माईलपुर और राघोपुर की स्थिति
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस्माईलपुर-बिंदटोली में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से घटने के बाद अब खतरे के निशान से महज 3 सेंटीमीटर नीचे आ गया है। वहीं दूसरी ओर, राघोपुर में गंगा का रौद्र रूप अब भी चिंता का विषय बना हुआ है, जहाँ नदी का जलस्तर चेतावनी के स्तर से 10 सेंटीमीटर ऊपर रिकॉर्ड किया गया है। जलस्तर में भले ही कमी आ रही हो, लेकिन तेज धारा के कारण तटबंधों पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
कोसी नदी के तेवर हुए नरम
गंगा के साथ-साथ कोसी नदी के तेवर भी बुधवार को थोड़े नरम पड़े हैं। अनुमंडल के मदरौनी और जेबी चोरहर क्षेत्र में कोसी के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। पानी घटने से निचले इलाकों में डूबे घरों और खेतों से पानी धीरे-धीरे निकलने लगा है। इसके बावजूद, स्थानीय ग्रामीण पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर घटने के दौरान ही अक्सर नदी किनारे की मिट्टी तेजी से कटकर विलीन होती है, जिससे कटाव का खतरा बढ़ जाता है।
विभाग की कड़ी नजर
नदियों के पानी में आई कमी के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। कई प्रमुख सुरक्षात्मक बांधों और स्परों के 'टो' पर पानी का जमाव बना हुआ है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता और कनीय अभियंताओं की टीम लगातार नावों के जरिए और पैदल मार्च कर तटबंधों की स्थिति का जायजा ले रही है। विभाग के अनुसार, सभी संवेदनशील बिंदुओं पर फ्लड फाइटिंग सामग्रियां जैसे जियो बैग, बालू की बोरियां और बोल्डर पर्याप्त मात्रा में स्टॉक कर लिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए रात-दिन निगरानी की जा रही है।