पूर्णिया कला भवन में फणीश्वर नाथ रेणु के नाटक पंचलाइट का शानदार मंचन

पूर्णिया के कला भवन स्थित सुधांशु रंगशाला में फणीश्वर नाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानी पर आधारित नाटक 'पंचलाइट' का सफल मंचन किया गया। इस प्रस्तुति में ग्रामीण जीवन और आपसी भाईचारे की मिसाल को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। नाटक की कहानी महतो टोली के लोगों द्वारा नई खरीदी गई पंचलाइट को जलाने के संघर्ष पर आधारित है।
- नाटक में गोधन नाम के एक युवक की कहानी दिखाई गई जिसे समाज ने बाहर कर दिया था।
- गोधन ही एकमात्र ऐसा व्यक्ति था जो पंचलाइट जलाना जानता था।
- पंचलाइट जलने से गांव वालों के आपसी झगड़े खत्म हो गए और सभी में मेल-मिलाप हो गया।
- नाटक का निर्देशन विश्वजीत कुमार सिंह ने किया था।
नाटक का मुख्य संदेश
यह नाटक यह संदेश देता है कि ज्ञान और कौशल को किसी भी जाति, सामाजिक भेदभाव या अहंकार के कारण दबाना नहीं चाहिए। समाज की तरक्की आपसी सहयोग पर निर्भर करती है। जीवंत अभिनय और ग्रामीण जीवन के सच्चे चित्रण के लिए इस नाटक की बहुत सराहना की गई। नाटक शुरू होने से पहले कला भवन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. डी. राम का स्वागत कार्यक्रम समन्वयक संजय कुमार सिंह ने गुलदस्ता देकर किया। साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय का स्वागत थिएटर कलाकार मिथिलेश राय द्वारा किया गया।
कलाकार और सहयोगी टीम
नाटक के कलाकारों ने अंत तक दर्शकों को बांधे रखा। कलाकारों में अश्विनी कुमार, प्रिया कुमारी, अजीत कुमार सिंह बप्पा, मिताली भौमिक, गरिमा कुमारी, प्रवीण कुमार, अदिति कुमारी, साक्षी झा, चंदन कुमार, अंजनी कुमार श्रीवास्तव, शिवाजी राम राव, सृजनी, कुंदन कुमार सिंह, संतोष कुमार, सुमित कुमार सिंह, रामाशंकर और ऋषभ आदित्य शामिल रहे।
संगठन और मंच सज्जा
उत्पादन टीम में रामपुकार टुट्टू, संगीता कुमारी, जगेश्वर पासवान (ढोल), ललित किशोर पासवान (गायन) का संगीत और मीरा झा, सुभाष यादव, अवधेश कुमार मिश्रा, मनोज रॉय कोरस सदस्य के रूप में शामिल थे। प्रसिद्ध चित्रकार किशोर कुमार गुल्लू दा ने मेकअप किया। नाटक के निर्देशक और परिकल्पक विश्वजीत कुमार सिंह थे, सह-निर्देशक अंजनी श्रीवास्तव थे और राज रोशन तथा बादल झा ने बैकस्टेज का काम संभाला।