मायागंज अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

MyBhagalpur Team1 September 20262 min read40 viewsHealth
मायागंज अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (मायागंज अस्पताल) में प्रसव के बाद 24 वर्षीय काजल कुमारी की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने हंगामा किया। काजल मिथुन सिंह की पत्नी थीं। वह सोमवार को शाम 5:30 बजे अस्पताल में भर्ती हुईं और रात 12:00 बजे उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। नवजात सुरक्षित है।

  • काजल कुमारी की प्रसव के बाद मायागंज अस्पताल में मौत
  • परिजनों ने डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ पर लगाया लापरवाही का आरोप
  • घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में किया लगभग दो घंटे तक हंगामा

खून की कमी और इलाज में लापरवाही का आरोप

परिजनों का आरोप है कि बच्चे के जन्म के बाद मरीज को लगातार खून बहने की समस्या हुई। इसके बाद डॉक्टरों ने उनका गर्भाशय निकाल दिया। 12 यूनिट खून चढ़ाने के बावजूद मरीज नहीं बची। मृतका के भाई विक्की ने बताया कि जब डॉक्टर खून चढ़ा रहे थे, तब भी मरीज का खून बहना बंद नहीं हुआ। मेडिकल स्टाफ ने उनकी गुहार पर ध्यान नहीं दिया और अपने चैंबर में बंद रहे। मेडिकल रिपोर्ट देने से भी मना कर दिया।

ब्लड प्रेशर मशीन में नहीं आया रीडिंग

विक्की ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने मंगलवार को ब्लड प्रेशर जांचने के लिए कहा, तो मशीन में कोई रीडिंग नहीं आई। इससे पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है। मौत के बाद मेडिकल स्टाफ ने अपने दरवाजे बंद कर लिए। जब परिवार ने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत करने की कोशिश की, तो उन्हें धमकी दी गई। डॉक्टरों ने कहा कि जिसे बुलाना है बुला लो, कुछ नहीं होगा।

पुलिस का हस्तक्षेप और अस्पताल की स्थिति

परिवार के करीब दो घंटे तक हंगामा करने के बाद बरारी पुलिस मौके पर पहुंची और मामला शांत कराया। अस्पताल प्रबंधन को अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। काजल की शादी 2022 में मिथुन सिंह से हुई थी और वह पहली बार मां बनी थीं। परिवार वाले शव को अंतिम संस्कार के लिए घर ले गए हैं। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि रात में इमरजेंसी और फैब्रिकेटेड वार्ड में मुख्य रूप से जूनियर डॉक्टर रहते हैं। प्रशासनिक देखरेख की कमी के कारण सीनियर सर्जन और फिजीशियन अक्सर गायब रहते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक इमरजेंसी कंट्रोल रूम कर्मी ने पुष्टि की कि सीनियर डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं और गंभीर मामलों को जूनियर संभालते हैं। अस्पताल अधीक्षक एचपी दुबे ने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है क्योंकि वह फिलहाल पटना में हाईकोर्ट के काम से छुट्टी पर हैं।

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