भागलपुर के प्राथमिक शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। इस खबर के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: - पटना हाईकोर्ट ने शिक्षकों को सरप्लस घोषित करने और तबादले पर रोक लगाई है। - यह फैसला ई-शिक्षकोष पोर्टल के माध्यम से हो रही ट्रांसफर प्रक्रिया पर आया है। - डॉ. शेखर कुमार गुप्ता और अन्य शिक्षकों ने मिलकर यह याचिका दायर की थी।
पटना हाईकोर्ट ने बिहार शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों को सरप्लस यानी अतिरिक्त घोषित करने और ई-शिक्षकोष पोर्टल के जरिए उनके तबादले की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। एकल पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति कुमार मनीष ने गुरुवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की पोस्टिंग और ट्रांसफर के संबंध में यथास्थिति यानी 'स्टेटस को' बनाए रखी जाए।
यह मामला भागलपुर जिले के प्राथमिक शिक्षकों से जुड़ा हुआ है। इस याचिका को संयुक्त रूप से प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ की भागलपुर जिला शाखा के अध्यक्ष डॉ. शेखर कुमार गुप्ता और अन्य शिक्षकों ने दायर किया था। इन अन्य शिक्षकों में शाहकुंड से मो. शयाकुर रहमान, आरपीएस श्रीनगर नगर निगम से किरण कुमारी और प्राथमिक विद्यालय दिलदारपुर तथा मध्य विद्यालय रामपुरडीह के शिक्षक शामिल हैं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब शिक्षा विभाग ने 29 जुलाई से 5 अगस्त के बीच याचिकाकर्ताओं को संदेश भेजकर उन्हें 'सरप्लस टीचर' घोषित कर दिया था। विभाग ने उन्हें बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नीति, 2026 के तहत ट्रांसफर के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया था। शिक्षकों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि 2006 और 2018 के ट्रांसफर नियमों तथा 25 जनवरी 2023 के विभागीय मेमो के तहत वे गैर-स्थानांतरणीय संवर्ग यानी नॉन-ट्रांसफरेबल कैडर की स्थिति और विशिष्ट सेवा शर्तों के हकदार हैं। उनका तर्क है कि उनके पदों को पहले ही 'डाइंग कैडर' घोषित किया जा चुका है और चूंकि अन्य स्कूलों में ऐसे पद मौजूद नहीं हैं, इसलिए उनका तबादला करना अनुचित है।
सरकार ने तर्क दिया कि नई 2026 ट्रांसफर नीति, 2006, 2018 और 2023 के प्रावधानों का स्थान लेती है। इसके जवाब में, शिक्षकों ने नई नीति के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी को चुनौती देने के लिए एक अंतरिम आवेदन दाखिल करने के वास्ते एक सप्ताह का समय मांगा, जिसकी कोर्ट ने अनुमति दे दी। अगली सुनवाई तक यथास्थिति का यह आदेश यह सुनिश्चित करता है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन याचिकाकर्ताओं को उनके वर्तमान स्कूलों या पदों से नहीं हटा सकते हैं।