भागलपुर में रबी महाअभियान की शुरुआत, किसानों को मिली वैज्ञानिक खेती की ट्रेनिंग

MyBhagalpur Team24 October 20262 min read0 viewsDevelopment and good news
भागलपुर में रबी महाअभियान की शुरुआत, किसानों को मिली वैज्ञानिक खेती की ट्रेनिंग

भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड में 24 अक्टूबर 2026 को त्रिसम भवन में एक बड़े प्रशिक्षण और बीज वितरण कार्यक्रम के साथ रबी महाअभियान-2026 का आधिकारिक उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक मुरारी पासवान और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया।

  • पीरपैंती और कहलगांव में रबी महाअभियान-2026 की हुई शुरुआत।
  • कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक खेती और मिट्टी बचाने के उपाय बताए।
  • बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य स्तर पर हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया।

विशेषज्ञों ने दी खेती की जानकारी

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इस सत्र के दौरान, कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार ने किसानों को रबी फसलों की वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीजों के इस्तेमाल और मिट्टी के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जरूरी रणनीतियों के बारे में जानकारी दी। विधायक पासवान ने जैविक खेती अपनाने की वकालत की, जबकि प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने किसानों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।

जिला और पंचायत स्तर पर कार्यक्रम

यह कार्यक्रम पूरे जिले में चलने वाले वासंती (रबी) महाअभियान-2026 का हिस्सा है, जो 24 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक भागलपुर के सभी प्रखंड मुख्यालयों में चलाया जा रहा है। इसके साथ ही, 26 अक्टूबर से 30 नवंबर तक 238 पंचायतों में 'कृषि जन कल्याण चौपाल-सह-बचाव खेत अभियान' चलाया जाना है। इसी तरह, कहलगांव के त्रिसम भवन में भी आज एक प्रशिक्षण और बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रखंड प्रमुख नूतन देवी ने की। यहां कृषि वैज्ञानिक पंकज कुमार ने फसल की बुवाई और कीट प्रबंधन पर मार्गदर्शन दिया।

राज्य स्तर पर अभियान का शुभारंभ

राज्य स्तर पर, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 38 किसान जागरूकता रथों और 2 ज्ञान रथों को हरी झंडी दिखाकर वासंती (रबी) महाअभियान-2026 का उद्घाटन किया। इस अभियान का उद्देश्य गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों के लिए खेती की लागत को कम करने और पैदाوار बढ़ाने के वास्ते 'जीरो टिलर' तकनीक और सीड ड्रिल मशीनों सहित आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी संसाधनों और टिकाऊ फसल प्रबंधन के बारे में तकनीकी साक्षरता बढ़ाकर किसानों को सशक्त बनाना है।

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