भागलपुर जिले के खरीक और नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर इलाके में गंगा नदी ने भयानक रूप ले लिया है। राघोपुर-काजीकौरेया जमींदारी तटबंध का 150-200 मीटर हिस्सा ढह गया है और गंगा का पानी गांवों में घुस गया है। प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
- तटबंध टूटने से सौ वर्ष पुराना चैती दुर्गा मंदिर गंगा में समाया।
- सैकड़ों घरों में तीन से चार फीट पानी भरने से लोग पलायन को मजबूर।
- पशुओं के चारे की तलाश में एक व्यक्ति के डूबने की खबर।
- एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटीं।
राघोपुर का ऐतिहासिक और करीब सौ वर्ष पुराना 'चैती दुर्गा मंदिर' देखते ही देखते ताश के पत्तों की तरह ढहकर गंगा नदी में समाहित हो गया। पुरानी रेलवे लाइन और बची हुई आवासीय बस्तियों पर भी कटाव का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ के पानी ने राघोपुर और आस-पास के गांवों में तबाही मचाई है। कई वार्ड पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और लोगों के घरों में तीन से चार फीट तक पानी भर गया है।
सैकड़ों परिवार अपना आशियाना छोड़कर ऊंचे स्थानों, राष्ट्रीय राजमार्ग और राहत शिविरों की ओर जा रहे हैं। सैकड़ों एकड़ फसलें नष्ट हो चुकी हैं और पशुओं के लिए चारे का संकट है। चारे की तलाश के दौरान एक व्यक्ति के डूबने की खबर है। जिलाधिकारी अलंकृता पांडे स्थिति पर नजर रख रही हैं। नाव हादसे के बाद ट्रैक्टरों से सामग्री पहुंचाई जा रही है। कम्युनिटी किचन और चिकित्सा शिविर बनाए गए हैं। सरकार और अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं और बचाव कार्य जारी है।