भागलपुर के राघोपुर तटबंध के डाउन स्ट्रीम में गंगा नदी का भीषण कटाव थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे आसपास के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ अब विक्रमशिला सेतु की सुरक्षा को लेकर भी बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।
- गंगा नदी लगातार तटबंध के किनारे भारी दबाव बना रही है।
- जल संसाधन विभाग की टीम बड़े जहाजों की मदद से मेगा जियो बैग डालने का बचाव कार्य युद्ध स्तर पर कर रही है।
- कटाव से गंगा की मुख्य धारा का दबाव सीधे विक्रमशिला सेतु की ओर बढ़ सकता है।
- राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और वीआईपी की पूर्व प्रत्याशी अपर्णा कुमारी ने मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
गंगा नदी लगातार तटबंध के किनारे भारी दबाव बना रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग की टीम पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और बड़े जहाजों की मदद से नदी में मेगा जियो बैग डालने का बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। स्थानीय विशेषज्ञों और आशंकाओं के मुताबिक,
राघोपुर तटबंध के डाउन स्ट्रीम में जिस रफ्तार से नदी का कटाव आगे बढ़ रहा है, उससे गंगा की मुख्य धारा और उसका जलस्तर का दबाव नवगछिया की दिशा से मुड़कर सीधे विक्रमशिला सेतु की ओर बढ़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो सेतु के पायों और एप्रोच रोड के आसपास नदी का बहाव बेहद गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। तकनीकी जानकारों का कहना है कि सेतु पर वास्तविक खतरे का सटीक आकलन विभागीय और तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है।
इस बीच, तटबंध की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से वीआईपी की पूर्व प्रत्याशी रहीं अपर्णा कुमारी ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि
विक्रमशिला सेतु के अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में समय रहते गाइड बांध का निर्माण कराया जाना चाहिए था, जिसमें घोर लापरवाही बरती गई। अपर्णा कुमारी ने पथ निर्माण मंत्री और क्षेत्रीय विधायक कुमार शैलेंद्र पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ दिन पहले मंत्री ने बयान दिया था कि यदि राघोपुर बांध कटता है तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। अपर्णा कुमारी ने कहा कि चूंकि बांध पर अभी भी खतरा पूरी तरह मंडरा रहा है और कटाव जारी है, इसलिए मंत्री को अपने वादे के मुताबिक तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। नदी की तेज धारा के कारण कटाव रोधी कार्य में काफी चुनौतियाँ आ रही हैं। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर और मजदूर दिन-रात स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हैं। कमजोर हिस्सों को सुरक्षित करने के लिए मेगा जियो बैग्स का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन
गंगा की लहरों का आक्रामक रुख स्थानीय ग्रामीणों और जिला प्रशासन की धड़कनें बढ़ाए हुए है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समय रहते इस कटाव को रोककर विक्रमशिला सेतु और राघोपुर बांध को मुकम्मल तौर पर सुरक्षित किया जा सकेगा?