भागलपुर में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के बीच राघोपुर-शंकरपुर तटबंध को सुरक्षित कर लिया गया है। इस खबर से जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: - जल संसाधन विभाग के चार दर्जन से अधिक इंजीनियरों की टीम चौबीसों घंटे मौके पर मुस्तैद रही। - गंगा नदी के बहाव की प्रवृत्ति में अचानक बदलाव के कारण फ्लड फाइटिंग के दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी। - राघोपुर और शंकरपुर के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और इंजीनियरों की सराहना की है।
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के भारी दबाव के बीच
राघोपुर-शंकरपुर तटबंध को फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित कर लिया गया है। तटबंध पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए जल संसाधन विभाग की इंजीनियरों की टीम ने दिन-रात कैंप कर लगातार निगरानी रखी और युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग को अंजाम दिया। तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग के चार दर्जन से अधिक इंजीनियरों की टीम चौबीसों घंटे मौके पर मुस्तैद रही।
जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता और टीम लीडर इंजीनियर जय प्रकाश ने बताया कि राघोपुर-शंकरपुर तटबंध के पास गंगा नदी के बहाव की प्रवृत्ति में अचानक आए बदलाव के कारण फ्लड फाइटिंग के दौरान टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। तटबंध के क्षतिग्रस्त होने के बाद विभागीय स्तर पर तत्काल एक्शन लिया गया और दिन-रात काम करके इसे सुरक्षित कर लिया गया। मुख्य अभियंता जय प्रकाश ने इस सफल अभियान का श्रेय पूरी टीम की मेहनत और सरकार के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में बिहार सरकार, जल संसाधन मंत्री और स्थानीय दोनों मंत्रियों का भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन मिला। इंजीनियरों और तकनीकी कर्मियों की टीम ने अपनी जान की परवाह न करते हुए लगातार मौके पर रहकर स्थिति को संभाला।
तटबंध को भविष्य में सुरक्षित रखने की योजना पर बात करते हुए मुख्य अभियंता ने कहा कि इस्माईलपुर इलाके में जिस तरह 'सीट पाइलिंग' तकनीक के जरिए बांध को स्थायी रूप से सुरक्षित किया गया है, ठीक उसी तर्ज पर राघोपुर तटबंध की भी स्थायी मरम्मती करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। विभागीय स्तर पर जल्द ही इसकी आगे की कार्ययोजना और तकनीकी समाधान पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
तटबंध के सुरक्षित होने पर राघोपुर और शंकरपुर के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों ने आपदा के समय डटे रहने वाले इंजीनियरों और कर्मचारियों की टीम की जमकर सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे जांबाज इंजीनियरों और कर्मियों की मेहनत को सलाम है, जिन्होंने हमारे घरों को डूबने से बचा लिया। हालांकि, इसके साथ ही ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि अब इस तटबंध की ऐसी स्थायी मरम्मती कराई जाए, जिससे आने वाले सालों में भी पूरा इलाका बाढ़ और भीषण कटाव के खतरे से हमेशा के लिए सुरक्षित हो सके।