भागलपुर के सबौर प्रखंड कार्यालय सभागार में शनिवार को सौर ऊर्जा जागरूकता को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को बिजली संकट से उबारने और पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित करना था। - कार्यशाला में ग्रामीणों को बिजली संकट से निपटने के लिए सौर ऊर्जा के बारे में बताया गया। - केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सोलर पैनल पर दी जा रही भारी सब्सिडी की जानकारी दी गई। - प्राकृतिक आपदा के समय भी सोलर सिस्टम से निर्बाध बिजली मिलने के फायदों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि
बिजली उत्पादन के लिए मुख्य रूप से कोयला और पानी जैसे सीमित प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। इन संसाधनों पर निर्भरता कम करने और भविष्य में बिजली संकट से बचने के लिए केंद्र सरकार ने सोलर एनर्जी को बढ़ावा देना शुरू किया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा,
भगवान सूर्य की रोशनी हर घर पर पहुंचती है, और अब उसी रोशनी से हर घर में बिजली बनेगी।
वक्ता ने आम लोगों को मिल रही राहत का जिक्र करते हुए कहा कि
पहले सोलर पैनल की कीमत अधिक होने के कारण आम लोग इसे लगवाने में असमर्थ थे। लेकिन अब केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार भी इस पर अतिरिक्त सब्सिडी दे रही है। इस भारी छूट के कारण
अब बहुत कम लागत में हर घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाया जा सकता है।
विगत दिनों आई आपदा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि
25-26 मई को आई भीषण आंधी के कारण बिजली के पोल टूट गए थे, जिससे कई दिनों तक क्षेत्र में बिजली पूरी तरह बाधित रही थी। अगर घरों में सोलर सिस्टम लगा हो, तो
ऐसी किसी भी आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा के समय भी घरों में निर्बाध रूप से बिजली की उपलब्धता बनी रहेगी। इस जागरूकता कार्यशाला के मौके पर प्रखंड के कई वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों ने भी सरकार की इस योजना के प्रति गहरी रुचि दिखाई।