सहरसा में बड़ा फैसला: जर्जर और खतरनाक स्कूल भवनों को गिराने का आदेश जारी

सहरसा जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसके तहत जर्जर, पुराने और बंद पड़े स्कूल भवन तथा शौचालयों की पूरी सूची तैयार करके जमा करने का निर्देश दिया गया है। नीरज कुमार के अनुसार इस कदम का मकसद खराब ढांचे के कारण स्कूल परिसर में होने वाले बड़े हादसों के जोखिम को कम करना है।
- सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों को जर्जर भवनों की सूची सौंपने का आदेश
- असुरक्षित ढांचों के अंदर पढ़ाई या शिक्षण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित
- बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम के इंजीनियर करेंगे तकनीकी जांच
- दरभंगा और सहरसा के कई स्कूलों में पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
कड़े निर्देश और आगे की प्रक्रिया
निर्देश में यह बात फिर से दोहराई गई है कि किसी भी असुरक्षित या खतरनाक ढांचे के अंदर कोई शैक्षणिक गतिविधि या शिक्षण सत्र नहीं चलाया जाएगा। सूचियां जमा होने के बाद बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम (BSEIUDC) के इंजीनियर मौके पर जाकर तकनीकी जांच करेंगे। इन मूल्यांकनों के बाद, संरचनाओं को आधिकारिक तौर पर लावारिस या जर्जर घोषित किया जाएगा, जिससे औपचारिक रूप से गिराने की प्रक्रिया शुरू होगी।
बिहार भर में सुरक्षा अभियान
यह पहल पूरे बिहार में चलाए जा रहे एक बड़े सुरक्षा अभियान को दिखाती है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की देखरेख के बाद दरभंगा में एक स्कूल को गिराया गया था। साथ ही सहरसा के हरिवंश मिडिल स्कूल और उच्च विद्यालय सिमरी में खतरनाक कक्षाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। ऐसी ही सुरक्षा चिंताएं भागलपुर जैसे जिलों में भी बनी हुई हैं, जहां जगन्नाथ मिडिल स्कूल, मिरजानहाट हाई स्कूल और अजमाबाद मिडिल स्कूल जैसे संस्थान छात्रों और स्टाफ के लिए खतरा पैदा करने वाली बुनियादी ढांचे की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। प्रखंड अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि संभावित हादसों को रोकने के लिए इन सुरक्षा नियमों का पूरी सख्ती से पालन कराया जाए।