मिथिलांचल क्षेत्र में रविवार 25 अक्टूबर 2026 को कोजागरा का पावन पर्व बहुत ही धूमधाम और भक्ति के साथ मनाया गया। महिषी और सहरसा में लोगों ने अपने घरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-पाठ किया।
इस खबर के मुख्य बिंदु:
- महिषी और सहरसा में घरों और मंदिरों में हुई विशेष पूजा।
- नवविवाहित दूल्हों के घरों में बंटी मखाना और मिठाइयां।
- हनुमान मंदिरों की सफाई कर बदले गए नए झंडे।
- सिहौल गांव में स्थापित की गई मां लक्ष्मी की प्रतिमा।
सहरसा और महिषी में खास तौर पर उन घरों में रौनक रही जहां हाल ही में दूल्हों की शादी हुई थी। परिवारों ने पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए और आसपास के लोगों को मखाना तथा मिठाइयां बांटी। महिषी में प्रभाष झा के घर पर एक भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं और लोगों का मनोरंजन किया।
महिषी प्रखंड में लोगों ने हनुमान मंदिरों और पवित्र स्थलों की साफ-सफाई की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भक्तों ने पुराने झंडों की जगह नए झंडे लगाए। इस दौरान भगवान को मखाना, नारियल और लड्डू का भोग लगाया गया। स्थानीय कीर्तन मंडलियों ने भजन गाकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
सहरसा के सत्तर कटैया प्रखंड के सिहौल गांव में कोजागरा के अवसर पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की गई। रविवार रात को प्राण प्रतिष्ठा हुई। पूजा समिति ने सोमवार 26 अक्टूबर 2026 की सुबह दर्शन और पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए खास इंतजाम किए। इन आयोजनों में मिथिला की पुरानी परंपराएं जैसे चुमावन और नवविवाहित जोड़ों द्वारा पचीसी खेलना शामिल रहा, जिससे दूल्हा-दुल्हन की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना की जाती है।