सहरसा सदर अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान, जानिए पूरा मामला

सहरसा सदर अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं 26 सितंबर 2026 को गंभीर रूप से बाधित हो गईं, क्योंकि डॉक्टरों ने कथित दुर्व्यवहार के विरोध में सुबह 11:00 बजे से इलाज रोक दिया। यह हड़ताल बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का हिस्सा है, जिससे कई मरीज फंसे हुए हैं।
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का आंदोलन
कई मरीज बिना इलाज कराए घर लौटने को मजबूर हुए, जबकि अन्य ने मायागंज अस्पताल में इलाज कराया। यह विवाद बिहार स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो अस्पताल कर्मियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ा है।
कार्रवाई और पत्रकार विवाद
डॉ. सुशील कुमार Azad, प्रभारी अधीक्षक और डॉ. रोशन लाल, चिकित्सा अधिकारी को विभाग मुख्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। यह कार्रवाई प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार अभिषेक कुमार से जुड़ी घटना के बाद हुई, जिन्होंने आरोप लगाया था कि अस्पताल में बीमार बच्चों की कवरेज के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ ने उनके साथ मारपीट की। अस्पताल प्रशासन ने इसका विरोध करते हुए दावा किया कि पत्रकार ने इमरजेंसी वार्ड के भीतर इलाज में बाधा डाली थी।
हड़ताल और मांगें
25 सितंबर 2026 तक यह विरोध प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी रहा, जिससे ओपीडी सेवाएं और आपातकालीन संचालन प्रभावित हुआ। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ, जिसने 19 सितंबर 2026 को 72 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया था, वह अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने, बायोमेट्रिक अटेंडेंस से जुड़े वेतन रोकने की प्रक्रिया बंद करने और क्लिनिकल क्षेत्रों में मीडिया आचरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी बनाने की मांग कर रहा है।
भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यकारी समिति सदस्य डॉ. शशांक सुमन विक्की ने हड़ताल कर रहे डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस बीच, जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि पत्रकार पर हुए हमले की जांच चल रही है और सहरसा जिला प्रशासन ने इस मामले में औपचारिक जांच के आदेश दिए हैं।