किशनगंज में 'सखी वार्ता' कार्यक्रम: महिलाओं को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी
किशनगंज में 'सखी वार्ता' कार्यक्रम के जरिए महिलाओं और किशोरियों को उनके कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

किशनगंज जिले के छगलिया ब्लॉक स्थित आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 12 में शनिवार को 'सखी वार्ता' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला मजिस्ट्रेट नवीन कुमार के निर्देशन में आयोजित यह कार्यक्रम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का हिस्सा था, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना था। इस कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं व अधिकारों पर चर्चा की।
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने इस मौके पर स्पष्ट किया कि प्रशासन महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक विकसित समाज के लिए महिलाओं का सशक्त होना अनिवार्य है। डीएम ने सख्त लहजे में कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा, भेदभाव या शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला अपने अधिकारों को जाने और सरकारी सहायता सेवाओं का लाभ उठाए।
सरकारी योजनाओं और सामाजिक बुराइयों पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को समाज में व्याप्त गंभीर मुद्दों जैसे बाल विवाह, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और मानव तस्करी के प्रति जागरूक किया गया। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (ICDS) वंदना पांडे ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों का मकसद सरकारी योजनाओं को समाज के सबसे पिछड़े तबके तक पहुंचाना है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं।
वहीं, जिला मिशन समन्वयक मोहम्मद शहबाज आलम ने केंद्र और बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने समाज की प्रगति के लिए शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता को सबसे जरूरी बताया। कार्यक्रम में जेंडर स्पेशलिस्ट सुशील कुमार झा, चमन आरा और वन स्टॉप सेंटर की केस वर्कर देविका कुमारी ने महिलाओं को शिकायत निवारण तंत्र और सहायता सेवाओं के बारे में विस्तार से समझाया। महिला पर्यवेक्षक वाणी झा ने स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला।
ग्रामीण महिलाओं ने इस पहल की काफी सराहना की और मांग की कि इस तरह के जागरूकता सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, ताकि वे अपने अधिकारों और सरकारी कार्यक्रमों के बारे में अपडेट रह सकें।