भागलपुर जिले के बरहट प्रखंड में स्थित मलैपुर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण गंभीर चिकित्सा संकट पैदा हो गया है। सरकारी दावों के उलट जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल में इलाज न मिलने से मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
दो दिन पहले एक गर्भवती महिला को डॉक्टर के न होने के कारण दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा था, जहां सदर अस्पताल में जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। शुक्रवार को सीता देवी, पवन सिंह राठौर और अनुराग कुमार जैसे मरीज इलाज के लिए मलैपुर अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टर न मिलने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
मलैपुर अस्पताल के मुख्य गेट पर लगे नोटिस से यह पुष्टि होती है कि आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुमार शर्मा केवल सोमवार से गुरुवार तक ओपीडी सेवाओं के लिए उपलब्ध हैं। बाकी दिनों के लिए मरीजों को बरहट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाने का निर्देश दिया जाता है। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि डॉक्टरों की कमी के कारण यह रोस्टर बदला गया है।
पूरे प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था, जिसकी आबादी एक लाख से अधिक है, केवल दो डॉक्टरों के भरोसे चल रही है। बरहट पीएचसी में केवल डॉ. विवेक कुमार सिंह और प्रखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय कुमार तैनात हैं। सीमित स्टाफ के कारण भारी दबाव बन गया है, खासकर तब जब बदलते मौसम के कारण सर्दी, खांसी, बुखार और पेट दर्द से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित इलाज न मिलने के कारण कई लोग अस्पताल आने के बजाय स्थानीय झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं या सीधे दुकानों से दवा खरीद रहे हैं। प्रखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय कुमार ने इस संकट को स्वीकार करते हुए बताया कि डॉक्टरों की कमी के बारे में विभाग को लिखित रूप से सूचित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि बरहट में पहले तैनात तीन डॉक्टरों के इस्तीफे के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा कि बरहट पीएचसी मरीजों के लिए 24 घंटे खुली रहती है।