भागलपुर के भगवानपुर प्रखंड के काजी रसूलपुर पंचायत के वार्ड नंबर आठ के रहने वाले 26 साल के पूर्व आईटी पेशेवर शशांक शेखर ने अपनी अच्छी नौकरी छोड़कर गांव वापसी की है। वे पहले 20 से 25 लाख रुपये सालाना का पैकेज पा रहे थे, लेकिन अब उन्होंने साइबर अपराध के खिलाफ लोगों को जागरूक करने का जिम्मा उठाया है। शशांक शेखर की संस्था ने बेगूसराय के तेघड़ा में ऐतिहासिक श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेले में एक जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान में एक इंसान जैसे दिखने वाले एआई रोबोट और कुत्ते के आकार के एआई रोबोट को मुख्य आकर्षण के रूप में पेश किया गया। इन रोबोट का इस्तेमाल लोगों को आधुनिक तकनीक और साइबर सुरक्षा के तरीकों के बारे में सिखाने के लिए किया गया।
मेले के दौरान बड़ी एलईडी स्क्रीन पर ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने, सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल के खतरों, फर्जी लिंक और एपीके फाइलों से जुड़े जोखिमों की जानकारी दिखाई गई। साथ ही, ओटीपी की सुरक्षा और डिजिटल फुटप्रिंट्स के प्रभावों के बारे में भी बताया गया। लोगों को सलाह दी गई कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी व संवेदनशील डिजिटल बातें किसी के साथ साझा न करें। जनता को एआई और डीपफेक तकनीक के बढ़ते गलत इस्तेमाल के प्रति भी सावधान किया गया। साइबर ठगी के शिकार लोगों को तुरंत शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी दी गई।
शशांक के मुताबिक, इन दोनों एआई रोबोट को कोयंबटूर की एक कंपनी ‘रोबोट मिरेकल’ से चार लाख रुपये के खर्च पर तीन दिन के लिए किराए पर लिया गया था। शशांक का मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने के लिए किया जाना चाहिए। अब तक शशांक ने इंटरनेट और एआई के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर विभिन्न स्कूलों और संस्थानों में 5,000 से ज्यादा बच्चों को शिक्षित किया है। उनका कहना है कि साइबर अपराध से बचना सिर्फ सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए हर इंटरनेट यूजर को डिजिटल रूप से सतर्क रहना होगा।