दक्षिण बिहार में मौसम का मिजजा बदलने वाला है और 7 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। आइए जानते हैं इस मौसम का फसलों और पशुओं पर क्या असर पड़ेगा और किसानों के लिए क्या चेतावनी दी गई है।
- मौसम विभाग ने 7 से 11 अक्टूबर तक दक्षिण बिहार में मौसम बदलने की चेतावनी दी है।
- भागलपुर क्षेत्र में भी इसका असर दिखने की पूरी संभावना है।
- धान, मक्का और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए खास कृषि सलाह जारी की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार 7 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के दौरान
अलग-अलग जगहों पर गरज के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। तापमान की बात करें तो
अधिकतम तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सुबह के समय हवा में नमी 75 से 80 प्रतिशत रहेगी जो दोपहर में घटकर 65 से 70 प्रतिशत हो जाएगी। हवाएं पूर्व दिशा से 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी।
धान की फसल जो दूध भरने की अवस्था में है, उसमें
'गांधी बग' की नियमित निगरानी करने की अपील की गई है। किसान भाई सुबह 8:00 बजे से पहले या शाम 5:00 बजे के बाद प्रति हेक्टेयर 10 से 15 किलोग्राम फालिडोल 10 प्रतिशत या मैलाथियान 10 प्रतिशत का छिड़काव करके इन कीटों को नियंत्रित कर सकते हैं। यदि भूरा माहू कीट (BPH) दिखाई दे तो इमिडाक्लोप्रिड या एसेफेट 75 प्रतिशत डब्लूपी का अनुशंसित खुराक में उपयोग करें। शुरुआती बोई गई धान की फसल में बालियां निकलते समय
प्रति हेक्टेयर 30 किलोग्राम नाइट्रोजन का ऊपरी छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। मक्का की फसल के लिए किसानों को सिलिंग के समय प्रति हेक्टेयर 30 किलोग्राम नाइट्रोजन डालने की सलाह दी जाती है।
यह समय मध्यम अवधि की फूलगोभी की किस्मों की रोपाई और देर से आने वाली किस्मों की बुआई के लिए बहुत अच्छा है। पत्ता गोभी के लिए 'पूसा ड्रम हेड' और 'पूसा अगेती' जैसी किस्में चुन सकते हैं। शुरुआती बोई जाने वाली मूली के लिए
'पूसा चेतकी', 'पूसा देशी', 'पूसा हिमानी', 'पूसा रश्मी', 'जापानी व्हाइट', 'पंजाब व्हाइट' और 'अर्का निशांत' किस्में अनुशंसित हैं। पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे जानवरों को 50:50 के अनुपात में हरा और सूखा चारा खिलाएं और साथ में
प्रतिदिन 20 से 30 ग्राम खनिज मिश्रण और नमक दें। इसके अलावा, मच्छरों, मक्खियों और अन्य कीटों को रोकने के लिए पशु आश्रयों के चारों ओर चूना छिड़कना चाहिए।