सृजन घोटाला: मुख्य साज़िशकर्ता अमरेंद्र यादव सरकारी सेवा से बर्खास्त

MyBhagalpur Team13 September 20262 min read15 viewsBihar
सृजन घोटाला: मुख्य साज़िशकर्ता अमरेंद्र यादव सरकारी सेवा से बर्खास्त

भागलपुर में हजार करोड़ रुपये से अधिक के सृजन घोटाला मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला नजारत शाखा के लिपिक-सह-तत्कालीन मुख्य नाजिर अमरेंद्र कुमार यादव को सरकारी सेवा से हमेशा के लिए बर्खास्त कर दिया गया है। वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोपों की जांच के बाद प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है। इस आदेश के बाद यादव भविष्य में देश के किसी भी सरकारी पद या नौकरी के योग्य नहीं रहेंगे।

  • अमरेंद्र कुमार यादव सरकारी सेवा से हमेशा के लिए बर्खास्त
  • बिहार सेवा कोड और संविधान के अनुच्छेद के तहत हुई कार्रवाई
  • सीबीआई जांच में मुख्य सह-साजिशकर्ता के रूप में आया था नाम

बर्खास्तगी के नियम और प्रशासनिक नीति

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यह कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई बिहार सेवा कोड के नियम 14 और 1709 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत की गई है। कार्रवाई की पुष्टि करते हुए जिला प्रशासन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को दोहराया और कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में वित्तीय अनुशासन सर्वोपरि है, जिससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता।

घोटाले में भूमिका और गिरफ्तारी

उल्लेखनीय है कि भागलपुर की संस्था 'सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड' के जरिए सरकारी फंड का अवैध रूप से डायवर्जन कर बड़े पैमाने पर गबन किया गया था। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि अमरेंद्र कुमार यादव ने शुरुआत में इस घोटाले की पहली प्राथमिकी में खुद शिकायतकर्ता के रूप में भूमिका निभाई थी। हालांकि, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने जांच की परतें खोलीं, तो पाया कि वह खुद इस घोटाले का एक मुख्य सह-साजिशकर्ता था। इसके बाद सीबीआई ने जनवरी 2018 में उसे गिरफ्तार कर लिया था।

अदालत का फैसला और सजा

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2025 में पटना की विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में अमरेंद्र कुमार यादव समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। कोर्ट ने इन्हें 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 14 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया।

रैकेट का खुलासा और आगे की जांच

सीबीआई की जांच में सामने आया था कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि इसमें जिला प्रशासन, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारी-कर्मचारी और सृजन एनजीओ के लोग मिलकर एक बड़ा रैकेट चला रहे थे। इस मामले में अब तक कई बैंक खाते सीज किए जा चुके हैं तथा एक बर्खास्त महिला अपर जिला मजिस्ट्रेट सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी उजागर हो चुकी है। फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो इस महाघोटाले की अपनी विस्तृत अंतिम जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।

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