बड़ी खुशखबरी! सुल्तानगंज से मुंगेर के बीच बनेगा शानदार मरीन ड्राइव, बदल जाएगी इलाके की सूरत

MyBhagalpur Team19 August 20262 min read60 viewsDevelopment and good news
बड़ी खुशखबरी! सुल्तानगंज से मुंगेर के बीच बनेगा शानदार मरीन ड्राइव, बदल जाएगी इलाके की सूरत

बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BSRDC) सुल्तानगंज और मुंगेर को जोड़ने वाले 42 किलोमीटर लंबे फोरलेन मरीन ड्राइव के निर्माण के काम में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। 5,119 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क 44 गांवों से होकर गुजरेगी।

इस प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:

  • कुल लंबाई: 42 किलोमीटर (फोरलेन)
  • कुल लागत: 5,119 करोड़ 80 लाख रुपये
  • प्रभावित क्षेत्र: 44 गांव
  • उद्देश्य: मुंगेर शहर को बाईपास देना और कनेक्टिविटी सुधारना

पर्यावरण मंजूरी और पेड़ों का संरक्षण

BSRDC ने पर्यावरण मंजूरी के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को आवेदन दिया है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण के लिए 726 पेड़ों को हटाना होगा, जिनमें से 517 पेड़ों को काटा जाएगा और 209 पेड़ों को दूसरी जगह लगाया जाएगा। BSRDC की तकनीकी टीम और मुंगेर व भागलपुर के वन विभाग के अधिकारियों ने साइट का निरीक्षण कर पेड़ों के संरक्षण की योजना तैयार कर ली है।

इन इलाकों से गुजरेगी सड़क

यह सड़क सफियाबाद, बरीarpur और घोरघाट जैसे क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसके अलावा यह हंडियो, मोहिउद्दीनपुर, संग्रामपुर, हिरोदियरा, मुंगेर वार्ड 1, मुंगेर वार्ड 29, जमालकितारा, बसदेवपुर, अमरपुर, मधोकिट्टा, हरनाथपुर बरारी, हरनाथपुर करारी, खेमनारनपुर, सिरमतपुर, चक अली, महुली, चक बीर, अयोध्या, चक इब्राहिमपुर, शंकरपुर, सिकंदरपुर, सीतलपुर, परसोतिमपुर, मिर्जापुर बरदा, नक्रा, नौगढ़ी, तारापुर दियारा, बिंदियरा, निरपुर 78, निरपुर 77 और कटगोला गांवों से होकर गुजरेगी।

पर्यटन और श्रद्धालुओं को होगा बड़ा फायदा

हाइब्रिड एनुइटी मॉडल पर आधारित यह प्रोजेक्ट श्री कृष्ण सेतु की कनेक्टिविटी को बेहतर करेगा और धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाएगा। यह मरीन ड्राइव सुल्तानगंज से बाबाधाम जाने वाले कांवरियों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।

इसके जरिए मुंगेर किला, चंडिका स्थान, कष्टहरिणी घाट, योगाश्रम, आईटीआई, खरगपुर झील, भीमबंध वन्यजीव अभयारण्य, पीर शाह नुफा की मज़ार और अजगैबीनाथ मंदिर जैसे स्थलों पर पहुंचना आसान हो जाएगा। साथ ही, धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए गंगा किनारे घाटों का विकास भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

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