भागलपुर के सुल्तानगंज प्रखंड में आवारा कुत्तों के हमले से दस लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों के अनुसार सभी घायलों को एंटी-रेबीज का टीका लगा दिया गया है और ये घटनाएं 29 सितंबर 2026 तक की हैं। इस स्थिति से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और अस्पताल की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं।
- सुल्तानगंज में आवारा कुत्तों के हमले से 10 लोग घायल
- घायलों को लगाई गई एंटी-रेबीज वैक्सीन
- पशु चिकित्सा कर्मियों की हड़ताल से टीकाकरण प्रभावित
सितंबर के शुरुआती दिनों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की कमी की बात सामने आई थी, जिसके बाद उप अधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा ने मुजफ्फरपुर से अतिरिक्त स्टॉक मंगाने के लिए एक दूत भेजा था। इसके अलावा, 28 सितंबर 2026 को सुल्तानगंज में पशुपालन विभाग के तहत काम करने वाले पशु चिकित्सा टीकाकर्मियों ने लंबित मानदेय और ग्रामीण क्षेत्रों में काम के दौरान सुरक्षा की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इस हड़ताल की वजह से टीकाकरण सेवाएं और ज्यादा बाधित हुई हैं।
इस बीच, भागलपुर नगर निगम ने शहरी इलाकों में पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत जयपुर की संस्था 'संतुलन जीव कल्याण' के साथ मिलकर हर दिन 50 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा रहा है। अधिकारियों ने कनाकैथी और भूतनाथ रोड स्थित एमआरएफ सेंटर पर बने केंद्रों का निरीक्षण किया है, जहां नसबंदी के बाद कुत्तों की पहचान के लिए उनके कान पर निशान लगाए जा रहे हैं। बिहार में पिछले पांच वर्षों में कुत्ते के काटने के मामलों में 10 गुना वृद्धि हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य के 34 पशु जन्म नियंत्रण केंद्र कुत्तों की आबादी के हिसाब से नाकाफी हैं और स्थानीय प्रशासन ही पीड़ितों के इलाज और प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी उठाएगा। इसके साथ ही, विश्व रेबीज दिवस यानी 28 सितंबर को तिलकामांझी चौक स्थित पशुपालन परिसर में जानवरों के लिए आयोजित होने वाला मुफ्त एंटी-रेबीज टीकाकरण शिविर सरकारी आदेश के बाद अचानक रद्द कर दिया गया।