भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों की मदद करने पर लाइन हाजिर किए गए सिपाही धनंजय पासवान ने न्याय की गुहार लगाई है। इस खबर से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं।
- निलंबित सिपाही धनंजय पासवान ने मानवाधिकार कार्यालय में आवेदन दिया है।
- उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की मदद करने पर लाइन हाजिर किए जाने की बात कही है।
- एसडीपीओ ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
भागलपुर, 11 सितंबर नवगछिया पुलिस जिला में कार्यरत सिपाही धनंजय पासवान को लाइन हाजिर किए जाने का मामला अब गरमा गया है।
सिपाही धनंजय पासवान ने भागलपुर स्थित 'शरन्य राष्ट्र मानवाधिकार' के कार्यालय में शुक्रवार को एक आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने मानवाधिकार संगठन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सहयोग करने की मांग की है।
मानवाधिकार कार्यालय में दिए अपने आवेदन में
सिपाही धनंजय पासवान ने कहा है कि उन्होंने बाढ़ आपदा के दौरान अपनी जान पर खेलकर पीड़ितों के लिए भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था की थी। वे लगातार लोगों की सेवा में जुटे हुए थे ताकि जनता के बीच पुलिस की एक बेहतर और मानवीय छवि बन सके। सिपाही का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी इस बढ़ती लोकप्रियता और बेहतर छवि को बिगाड़ने के लिए पुलिस प्रशासन को भ्रमित किया। सोशल मीडिया पर उनके सेवा कार्यों को गलत तरीके से पेश कर अन्य माध्यमों पर भ्रम फैलाया गया, जिसके आधार पर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। धनंजय पासवान ने कहा, जिस पुलिस पर लोग विश्वास करते हैं, ऐसी कार्रवाइयों से उनका भरोसा उठ जाएगा। मैंने केवल पुलिस विभाग का मान बढ़ाने का प्रयास किया था। मैं किसी भी प्रकार की जांच के लिए पूरी तरह तैयार हूं।
सिपाही का आवेदन मिलने के बाद
मानवाधिकार के अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल नवगछिया पुलिस के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी से फोन पर बात की और पूरे मामले से अवगत कराया। बातचीत के दौरान नवगछिया एसडीपीओ ने मानवाधिकार अध्यक्ष को पूरा आश्वासन दिया है कि इस मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच की जाएगी। एसडीपीओ ने कहा कि यदि सिपाही धनंजय पासवान जांच में निर्दोष पाए जाते हैं, तो उन्हें पूरे सम्मान के साथ पुलिस विभाग में पुनः स्थापित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाल ही में सोशल मीडिया पर सिपाही धनंजय पासवान के नाम से एक क्यूआर कोड पोस्ट वायरल हुआ था, जिसमें बाढ़ राहत के नाम पर कथित तौर पर आर्थिक सहयोग की मांग की गई थी। वर्दी की आड़ में नियमों के खिलाफ इस तरह की गतिविधि को अनुशासनहीनता मानते हुए नवगछिया एसपी के निर्देश पर सिपाही को लाइन क्लोज कर दिया गया था और मामले की जांच एसडीपीओ को सौंपी गई थी। अब देखना यह होगा कि पुलिस जिला नवगछिया की जांच में सिपाही धनंजय पासवान के इन मानवतावादी दावों और सोशल मीडिया पर लगे आरोपों की क्या सच्चाई सामने आती है।