भागलपुर में सामाजिक संस्था स्वाभिमान के तत्वावधान में मंदरोजा स्थित प्रगति शिक्षण संस्थान में अंग क्षेत्र के महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू सियाराम सिंह की 121वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी ने की, जबकि उद्घाटन मुख्य अतिथि रंजन कुमार राय ने बाबू सियाराम सिंह के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
- मंदरोजा स्थित प्रगति शिक्षण संस्थान में मनाई गई जयंती
- अंग क्षेत्र के महान स्वतंत्रता सेनानी थे बाबू सियाराम सिंह
- कार्यक्रम की अध्यक्षता जगतराम साह कर्णपुरी ने की
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रंजन कुमार राय ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अंग भूमि के बाबू सियाराम सिंह का योगदान अविस्मरणीय है।
5 अक्टूबर 1905 को सुल्तानगंज के तिलकपुर में जन्मे सियाराम बाबू ने आजादी की लड़ाई में अपने अदम्य साहस से अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ा दी थी। मुख्य अतिथि प्रो. नवल किशोर सिंह ने उनके ऐतिहासिक योगदानों को रेखांकित करते हुए कहा कि सियाराम बाबू ने साइमन कमीशन के बहिष्कार, असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के फौजी दस्ते को सहयोग देने और आजादी की लड़ाई को धार देने के लिए सियाराम दल का गठन किया था, जो अंग्रेजों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया था। अपने अध्यक्षीय भाषण में संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस महान स्वतंत्रता सेनानी को उनके शौर्य के कारण 'दूसरा कुंवर सिंह' कहा जाता था,
जिन्होंने 1930-32 के बीच कई बार जेल यात्राएं कीं और 1934 के विनाशकारी भूकंप के समय डॉ. राजेंद्र प्रसाद व दीप नारायण बाबू के साथ मिलकर मुंगेर और समस्तीपुर में मानवता की मिसाल पेश की, आज इतिहास में उन्हें भुला दिया गया है। नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने की जरूरत है। जयंती समारोह को विजय मंडल, डॉ. संजय कुमार, राजीव रंजन, आशीष कुमार, प्रेम कुमार प्रिय और प्रणव कुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोगों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रेम कुमार प्रिय द्वारा किया गया।