किशनगंज के ठाकुरगंज सब-रजिस्ट्री ऑफिस ने जिले की पहली पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री में गड़बड़ी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सब-रजिस्ट्रार अमित रंजन ने उन दावों को गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि जमीन का विवरण बदला गया है, कृषि योग्य जमीन को चुर्ली बाजार की संपत्ति बताया गया है और रजिस्ट्री कम कीमत पर की गई है। जांच के बाद ऑफिस ने पुष्टि की है कि जमीन, उसकी चौहद्दी और मूल्यांकन बिल्कुल सही हैं।
यह मामला 24 अगस्त को दो डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा है। यह जमीन नेजागाछ, थाना नंबर 13, खाता नंबर 237 और खेसरा नंबर 1390 में स्थित है।
दस्तावेज़ों के अनुसार इस जमीन की चौहद्दी उत्तर में सड़क, दक्षिण में खरीददार, पूर्व में नृपेंद्र विजय सिंह और पश्चिम में मालिक की संपत्ति दर्ज है। आरोप मिलने के बाद 25 अगस्त को मौके पर जाकर जांच की गई थी। जांच में यह सही पाया गया कि भौतिक चौहद्दी रजिस्टर्ड दस्तावेजों से बिल्कुल मेल खाती है।
इस दौरान खीरा लाल राय, रघुवीर राय और सूरज तिवारी समेत कई स्थानीय लोगों से बातचीत की गई, जिन्होंने जमीन के विवरण की पुष्टि की। अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि गलत जमीन की रजिस्ट्री का कोई सबूत नहीं मिला है।
कम मूल्यांकन के आरोपों पर सब-रजिस्ट्रार रंजन ने कहा कि जमीन का मूल्यांकन विभागीय अधिसूचना के तहत मिनिमम वैक्वेशन रजिस्टर के अनुसार किया गया है। उन्होंने साफ किया कि रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान सभी विभागीय नियमों का सख्ती से पालन किया गया है।
प्रक्रिया के बारे में बताते हुए रंजन ने कहा कि पेपरलेस सिस्टम में दोनों पक्ष अपने नागरिक पहचान पत्र का उपयोग करके खुद अपने दस्तावेज तैयार करते हैं और जमीन का विवरण दर्ज करते हैं, जिससे कार्यालय स्तर पर फेरबदल की कोई गुंजाइश नहीं रहती है।
इस पूरी प्रक्रिया में बायोमेट्रिक अंगूठे के निशान और वन-टाइम पासवर्ड के जरिए आधार सत्यापन और ई-हस्ताक्षर शामिल होते हैं। रजिस्ट्री स्वीकार होने से पहले दोनों पक्षों को खाता, खेसरा, क्षेत्रफल, मूल्यांकन और चौहद्दी सहित सभी विवरणों की पुष्टि करनी होती है। सब-रजिस्ट्रार ने जोर देकर कहा कि पेपरलेस प्रणाली को पारदर्शिता बढ़ाने और छेड़छाड़ रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। एक बार जमा होने के बाद वेब कॉपी लॉक हो जाती है और अधिकृत पहुंच तथा ओटीपी के बिना अधिकारी या पक्ष इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं। उन्होंने पुष्टि की कि यह रजिस्ट्री 1908 के पंजीकरण अधिनियम के अनुपालन में पूरी की गई थी और गड़बड़ी के सभी आरोप निराधार पाए गए हैं।