लचुआ के तीर्थंकर महावीर विद्या मंदिर में रंगोली प्रतियोगिता, छात्रों ने उकेरे सामाजिक मुद्दे
लचुआ के तीर्थंकर महावीर विद्या मंदिर के छात्रों ने रंगोली के जरिए भ्रष्टाचार और राजनीति जैसे सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई।

दिवाली के मौके पर लचुआ (सिकंदरा) स्थित तीर्थंकर महावीर विद्या मंदिर में एक अनोखी रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आचार्य श्री चंदना जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्रों ने केवल रंगों से कलाकृति ही नहीं बनाई, बल्कि समाज, राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर अपनी जागरूकता का प्रदर्शन किया। स्कूल के चार अलग-अलग हाउस के छात्रों ने अपनी रचनात्मकता के जरिए देश की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों को रंगोली के माध्यम से पेश किया।
कला के जरिए सामाजिक संदेश की गूँज
इस प्रतियोगिता में हर हाउस ने एक विशेष थीम को चुना, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान खींचा:
- वर्धमान हाउस: यहाँ के छात्रों ने राजनीतिक स्थितियों को दर्शाया। उन्होंने चुनाव के समय किए जाने वाले वादों और चुनाव के बाद की जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को दिखाया और जागरूक मतदाताओं की जरूरत पर जोर दिया।
- महावीर हाउस: इस हाउस ने शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को अपनी रंगोली का विषय बनाया और नैतिकता व पारदर्शिता की वकालत की।
- गौतम हाउस: यहाँ समाज में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश दिया गया। छात्रों ने ईमानदारी अपनाने और व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने की अपील की ताकि एक भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र का निर्माण हो सके।
- सुधर्मा हाउस: इस हाउस ने 'अखंड भारत बनाम आधुनिक भारत' की थीम चुनी, जिसमें भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच समन्वय को दिखाया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसएसबी कोरासी कैंप के कमांडेंट पवन कुमार पासवान अपनी टीम के साथ शामिल हुए। उन्होंने सभी रंगोलियों का बारीकी से निरीक्षण किया और छात्रों की सोच व रचनात्मकता की जमकर सराहना की। उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कृत भी किया।
स्कूल प्रशासन और उप-प्रधानाचार्य ने बताया कि दिवाली के समय हर साल ऐसे आयोजन किए जाते हैं ताकि छात्रों में तार्किक सोच, राष्ट्रीय गौरव और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो सके। स्कूल का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों को एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना है। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि कला केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम भी हो सकती है।