TMBU भागलपुर: ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर दो दिवसीय सेमिनार संपन्न
TMBU भागलपुर में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण पर दो दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें रोजगार के नए रास्तों पर चर्चा हुई।

तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMBU) में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। 5 नवंबर, 2026 को संपन्न हुए इस कार्यक्रम का मुख्य विषय 'विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन विकास' था। इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और युवाओं व महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शांतिनिकेतन स्थित विश्व-भारती विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष सरकार शामिल हुए। सेमिनार के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल ट्रेनिंग देना और सर्टिफिकेट बांट देना बेरोजगारी की समस्या का समाधान नहीं है। चर्चा में यह बात सामने आई कि कौशल विकास कार्यक्रमों को स्थानीय बाजार की जरूरतों और छोटे व्यवसायों की मांग के अनुसार ढालना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कौशल प्रशिक्षण वर्तमान मार्केट डिमांड के हिसाब से नहीं होगा, तब तक गांवों में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ेंगे।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के नए रास्ते
सेमिनार में महिलाओं की भागीदारी और उनके नेतृत्व कौशल को बढ़ाने पर गहन चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें अपना स्वतंत्र व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। साथ ही, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने पर भी बल दिया गया।
इसके अलावा, कार्यक्रम में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर भी बात हुई। सेमिनार के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें शामिल थे:
- डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना।
- खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल।
- लघु उद्योगों का विकास और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा।
- सतत आजीविका के स्थायी साधनों की स्थापना।
इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य शोध और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर ऐसी नीतिगत सिफारिशें तैयार करना है, जिससे ग्रामीण रोजगार और आजीविका के अवसरों को वास्तव में बढ़ाया जा सके।