टीएमबीयू कर्मचारियों की प्रमोशन में देरी, शिक्षकों की अधिसूचना रुकी

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय यानी TMBU कर्मचारियों को प्रमोशन नहीं मिलने की वजह से आलोचना का सामना कर रहा है, जबकि इसके लिए कमेटियां और आधिकारिक नियम बनाए गए थे। शुरुआत में विश्वविद्यालय ने मेरिट स्कीम के तहत प्रमोशन के लिए आवेदन मंगाए थे, लेकिन बाद में इस प्रक्रिया को केवल टाइम-बाउंड स्कीम तक सीमित करने का फैसला किया गया।
शिक्षकों की अधिसूचना और तकनीकी पेचीदगियां
अधिकांश विषयों के शिक्षकों के प्रमोशन पिछले महीने फाइनल हो गए थे, लेकिन औपचारिक अधिसूचनाएं अभी तक जारी नहीं की गई हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन एक विषय के लिए नेगेटिव रिपोर्ट आने के कारण सीधे अधिसूचना जारी करने से बच रहा है, और किसी भी विवाद से बचने के लिए सिंडिकेट के जरिए प्रक्रिया पूरी करना चाहता है। इस मामले पर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार उपलब्ध नहीं हो पाए। पिछले तीन महीनों में शिक्षकों की प्रमोशन प्रक्रिया दो बार हो चुकी है। शिक्षकों को पहले भी पूर्व कुलपति जवाहरलाल के कार्यकाल में और उससे पहले भी प्रमोशन मिल चुके हैं। इसके विपरीत, कर्मचारियों को 2016 के बाद से कोई प्रमोशन नहीं मिला है।
कर्मचारी संघ का पक्ष
यूनिवर्सिटी एम्पलाइज यूनियन के सीनेटर और सचिव रंजीत कुमार ने मौजूदा तरीके में तकनीकी खामियों पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि हालांकि यूनिवर्सिटी ने मेरिट प्रमोशन स्कीम के तहत आवेदन स्वीकार किए थे, लेकिन अब टाइम-बाउंड स्कीम को अनिवार्य किया जा रहा है। कुमार ने तर्क दिया कि अगर टाइम-बाउंड स्कीम के तहत प्रमोशन दिए जाते हैं, तो बिना आवेदन के सभी योग्य कर्मचारियों को अपने आप प्रमोशन मिलना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि यूनिवर्सिटी केवल चौथे ग्रेड के कर्मचारियों तक प्रमोशन सीमित करना चाहती है, जिससे उनका वेतनमान तो बढ़ेगा लेकिन पद का नाम नहीं बदलेगा। मेरिट स्कीम के तहत चौथे ग्रेड के कर्मचारी लोअर डिवीजन क्लर्क के पद पर प्रमोशन के योग्य होते।