टीकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में बाढ़ का पानी उतरने के बाद छात्रों और कर्मचारियों के लिए संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। 21 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर से पानी साफ होने के बावजूद ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने या रुके हुए पानी को हटाने जैसे जरूरी सफाई के काम नहीं किए हैं, जिससे वहां मच्छरों के पनपने की जगह बन गई है।
- बाढ़ का पानी हटने के बाद भी TMBU परिसर में सफाई नहीं हुई है।
- स्वास्थ्य केंद्र तीन साल से बदहाल है और बिना दवा के चल रहा है।
- महापौर और जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर साफ-सफाई अभियान चलाया है।
विश्वविद्यालय की पुरानी लापरवाही के कारण यह स्वास्थ्य संकट और भी गंभीर हो गया है। जनवरी 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक TMBU का स्वास्थ्य केंद्र तीन साल से ठप पड़ा है।
यह केंद्र बिना दवाइयों के चल रहा है और एक संविदा डॉक्टर पर 20,000 मरीजों की जिम्मेदारी है। प्रशासनिक कार्रवाई न होने के कारण 15 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को अपने विभागों में खुद पैसे जुटाकर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करना पड़ा था।
विश्वविद्यालय के कामकाज के उलट दूसरे इलाकों में बड़े पैमाने पर काम किए जा रहे हैं। भागलपुर नगर निगम की मेयर डॉ. वसुंधरा लाल ने 19 सितंबर 2026 को बाढ़ प्रभावित वार्डों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा स्प्रे कराने का आदेश दिया था। इसी तरह राज्य स्वास्थ्य विभाग ने 20 सितंबर 2026 को बाढ़ वाले गांवों में ब्लीचिंग पाउडर डालने और हैलोजन टैबलेट बांटने का सफाई अभियान शुरू किया। उसी दिन जिला पार्षद गौरव राय ने जिलाधिकारी से नौगचिया में महामारी से बचाव के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की, क्योंकि सड़ते हुए बाढ़ के पानी से स्वास्थ्य को खतरा है।
ग्रामीणों ने भी डायरिया, हैजा, टाइफाइड और त्वचा के संक्रमण जैसी पानी से होने वाली बीमारियों के डर से तुरंत मलबा हटाने और कीड़े मारने की दवा का छिड़काव करने की मांग की है।