टीएमबीयू में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न: विकसित भारत के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जरूरी

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में विकसित भारत @ 2047 के लिए समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मानव संसाधन विकास पर चर्चा हुई।

Ishita Kumari5 November 20262 min read0 viewsDevelopment and good news
टीएमबीयू में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न: विकसित भारत के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जरूरी

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में 'विकसित भारत @ 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय बहुविषयक संगोष्ठी का गुरुवार को समापन हो गया। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन विकास और समावेशी विकास की संभावनाओं को तलाशना था। यह आयोजन विश्वविद्यालय के ग्रामीण अर्थशास्त्र एवं सहकारी प्रबंधन विभाग तथा औद्योगिक संबंध एवं कार्मिक प्रबंधन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

संगोष्ठी के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में काफी गहमागहमी रही, जहां 22 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना सबसे अनिवार्य कदम होगा। चर्चा के दौरान कौशल विकास, भूमि क्षरण, महिला सशक्तीकरण और समावेशी उद्यमशीलता जैसे गंभीर विषयों पर गहन विमर्श किया गया।

विशेषज्ञों ने साझा किए विचार और सुझाव

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सत्र के दौरान कृषि आर्थिक अनुसंधान केंद्र के डॉ. रंजन कुमार सिन्हा ने भूमि उपयोगिता और उसके क्षरण पर चिंता जताई, जबकि डॉ. उमेश प्रसाद नीरज ने गांधीवादी सिद्धांतों के आधार पर संसाधनों के समान वितरण और कौशल विकास की आवश्यकता बताई। वहीं, डॉ. संतोष कुमार का मानना था कि केवल शिक्षित और स्वस्थ मानव पूंजी के जरिए ही कृषि श्रम उत्पादकता में वास्तविक सुधार लाया जा सकता है।

डिजिटल माध्यम से जुड़े मेरठ विश्वविद्यालय के प्रो. विक्रम वर्मा ने स्वयं सहायता समूहों की मजबूती और महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही प्रो. तूलिका सक्सेना ने सतत विकास के लिए नवाचार (innovation) आधारित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता डॉ. राजीव कुमार सिन्हा और राजेश तिवारी ने की, जिसमें कई शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र पढ़े।

समापन सत्र में पूर्व कुलपति प्रो. के.के. सिंह, प्रो. आर.सी.पी. वर्मा और प्रो. रविशंकर चौधरी समेत कई वरिष्ठ शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार ओझा, वित्त पदाधिकारी, प्रो. उग्र मोहन झा और आयोजन सचिव डॉ. अश्वजीत राठौर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और शोधार्थी मौजूद रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस बौद्धिक चर्चा का विधिवत समापन हुआ।

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