भागलपुर समेत छह जिलों में खुलेंगे आदिवासी बहुउद्देशीय विपणन केंद्र, देखिए पूरी खबर

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत केंद्र सरकार की योजना से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। इस योजना के तहत भागलपुर में एक आदिवासी बहुउद्देशीय विपणन केंद्र बनाया जाएगा, जिससे लगभग 300 आदिवासी लाभार्थियों को सीधा बाजार मिलेगा।
- भागलपुर समेत छह जिलों में बनेंगे केंद्र
- करीब एक करोड़ रुपये आएगी लागत
- बिचौलियों की होगी छुट्टी और बढ़ेगी कमाई
भागलपुर में जमीन की तलाश शुरू
जिला मजिस्ट्रेट से 0.5 एकड़ जमीन आवंटन के लिए रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है। भागलपुर के अलावा बांका, कटिहार, रोहतास, पूर्णिया और किशनगंज में भी ऐसे केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन जिलों का चयन उनकी महत्वपूर्ण आदिवासी आबादी के आधार पर किया गया है। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य आदिवासी उत्पादों को इकट्ठा करना, उनके मूल्य को बढ़ाना और विपणन में सुधार करना है, जिससे बांस और बेंत की वस्तुएं, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, वन उपज, शहद, मसाले, खाद्य वस्तुएं और अन्य स्थानीय सामान बनाने वाले आदिवासी परिवारों की आय बढ़ सके।
इन गांवों में हो रहा है सर्वे
जिला प्रशासन पीरपैंती प्रखंड के प्यालपुर, राजगांव और राजगांव आराजी गांवों में जमीन का सर्वे कर रहा है। जिला मजिस्ट्रेट अलंकृता पांडेय के निर्देशों के बाद, जिला कल्याण अधिकारी राजीव कुमार रवि ने इन संभावित स्थलों का निरीक्षण किया। इन तीनों गांवों में आदिवासी आबादी अधिक है, और रिपोर्ट से पता चलता है कि केंद्रों के निर्माण के लिए पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध है।
मिलेंगे ये बड़े फायदे
इन केंद्रों की स्थापना से तीन मुख्य लाभ मिलने की उम्मीद है: गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर आदिवासी समूहों के लिए एक मजबूत विपणन ढांचा तैयार होगा, आदिवासी उत्पादित सामानों की बिक्री आसान होगी, और आधुनिक बाजार मानकों के अनुसार बेहतर पैकेजिंग सुविधाएं मिलेंगी। इससे बिचौलियों की जरूरत खत्म होगी और कुल कमाई बढ़ेगी।