भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर चल रहा मरम्मत का काम नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा यानी एनएमसीजी के नियमों के मुताबिक हो रहा है। जल शक्ति मंत्रालय के आदेश के अनुसार गंगा नदी से जुड़े किसी भी काम में पर्यावरण के नियमों का पालन करना जरूरी है ताकि नदी साफ बनी रहे। ठेकेदारों के लिए यह नियम है कि स्लैब काटने से निकलने वाला मलबा नदी में न फेंका जाए बल्कि उसे पूरी तरह हटाया जाए। पहले कमजोर स्लैब को तोड़ने के बाद, अब मजदूर दूसरे कमजोर स्लैब और रेलिंग को हटा रहे हैं। इसके साथ ही पीसीसी गर्डर को भी काटा जा रहा है और इस काम के पूरा होने पर तीसरे कमजोर स्लैब को भी हटाने की योजना है।
बीती 3 मई की रात को गंगा में गिरे क्षतिग्रस्त हिस्से को बाहर निकालने की तैयारियां चल रही हैं। नदी के ऊपर और तलहटी में सुरक्षित तरीके से कटाई का काम पूरा करने के लिए लोहे का जाल जैसा मचान बनाया जा रहा है। सुरक्षा के लिहाज से काम के दौरान किसी मजदूर के नदी में गिरने पर उसे बचाने के लिए नावें तैनात की गई हैं। रोशनी की कमी के कारण रात में यह काम रोजाना नौ बजे तक ही बंद कर दिया जाता है।
यह मरम्मत का ठेका एसपी सिंगला कंपनी को मिला है। इस कंपनी ने स्लैब काटने का काम मेट एंड एसोसिएट डिमोलिश नाम की एजेंसी को दिया है। शनिवार को एसपी सिंगला के विशेषज्ञ गुरप्रीत सिंह ने काम की प्रगति देखने के लिए मौके का दौरा किया। पुल निर्माण निगम ने एसपी सिंगला परिसर के अंदर ही अपना दफ्तर बना लिया है, जहां प्रोजेक्ट के नक्शों की जांच की जा रही है।
पुल निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार ने इस बात की पुष्टि की है कि कटाई की सारी प्रक्रिया तय एनएमसीजी मानकों के अनुसार ही की जा रही है।