विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज हटाने का काम तेजी से जारी, स्थायी पुल का निर्माण होगा

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु पर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और स्थायी ट्रस्ट ब्रिज के निर्माण के लिए जीआरईएफ (बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन की तकनीकी विंग) ने चार बेली ब्रिज हटाने का काम तेज कर दिया है। 2 अक्टूबर 2026 तक चार में से दो ब्रिज सफलतापूर्वक हटा दिए गए हैं। भागलपुर की तरफ स्थित 100 फीट लंबा दूसरा ब्रिज शुक्रवार 2 अक्टूबर को पूरी तरह हटा दिया गया। इसके बाद 90 फीट लंबे तीसरे ब्रिज पर काम शुरू हुआ, जिसे ढाई घंटे के बाद रोक दिया गया। यह काम शनिवार सुबह 5 बजे फिर से शुरू होना तय है। पहला 60 फीट का ब्रिज सात घंटे में हटाया गया था, जबकि 90 फीट और 100 फीट की संरचनाओं, जिनमें प्रत्येक में तीन पैनल हैं, को हटाने में लगभग दो-दो दिन का समय लग रहा है। टीम के सामने 170 फीट लंबे बेली ब्रिज को हटाने की एक बड़ी चुनौती आने वाली है। कैप्टन सूरज लाड और सहायक अभियंता प्रनोदित मजूमदार की देखरेख में 40 सदस्यों की टीम रोज सुबह 5 बजे काम शुरू करती है। सिक्किम के पहाड़ी इलाकों से आए कुछ कर्मियों ने तेज गर्मी में काम करने में परेशानी की बात कही है। मरम्मत और नए स्टील ट्रस्ट ब्रिज को पूरा करने का लक्ष्य तीन महीने का है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गंगा के बढ़ते जलस्तर, संभावित सर्दियों के कोहरे और ठंड के मौसम के कारण समय सीमा चार महीने तक बढ़ सकती है। रैंप कटिंग और स्लैब हटाने सहित तैयारी का काम चल रहा है। विक्रमशिला सेतु पर 30 सितंबर 2026 की आधी रात से सभी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। यह स्थायी मजबूती का आदेश उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिया था और इसकी पुष्टि बिहार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने की थी। हालांकि खगड़िया सांसद राजेश वर्मा ने 27 सितंबर को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ जैसे त्योहारों के सीजन के बाद तक ब्रिज हटाने के काम में देरी का अनुरोध किया था, लेकिन अधिकारियों ने तय शेड्यूल के मुताबिक काम जारी रखा। यात्रियों की मदद के लिए गंगा नदी पर 24 घंटे 12 मुफ्त नावें (फेरी सेवा) चलाई जा रही हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए निर्माण सामग्री पंजाब और हरियाणा से मंगाई गई है और भागलपुर पहुंचाई गई है।