शानदार तकनीक: विक्रमशिला सेतु पर मुंबई की टीम कर रही कार्बन प्लेटिंग

विक्रमशिला सेतु के स्थायी जीर्णोद्धार का कार्य अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड की देखरेख में चल रहे इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत पुल के ढांचे को अत्याधुनिक तकनीक से नया जीवन दिया जा रहा है।
मुंबई की टीम कर रही काम
सेतु के सबसे कमजोर हिस्से पिलर संख्या 1 से 4 को मजबूत करने के लिए मुंबई की एक विशेष 48-सदस्यीय तकनीकी टीम दिन-रात जुटी हुई है। यह टीम पुल के निचले स्लैब सेक्शन की ग्राइंडिंग कर उच्च क्षमता वाले कार्बन फाइबर, कार्बन लेमिनेट और कार्बन प्लेट्स की कोटिंग कर रही है, जिससे पुल की उम्र सीधे 25 साल और बढ़ जाएगी।
घटाया गया 50 टन लोड
अभियंताओं के अनुसार, स्टील ट्रस ब्रिज और नए स्लैब स्थापित करने से पहले मुख्य ढांचे पर दबाव कम करना बेहद जरूरी था। इसके लिए कटर मशीनों की मदद से पुल की पुरानी कंक्रीट रेलिंग और सड़क की ऊपरी डामर को काटकर पूरी तरह हटा दिया गया है। इस प्रक्रिया से मुख्य गर्डर्स पर पड़ने वाला लगभग 45 से 50 टन का अतिरिक्त और अनावश्यक स्थिर भार कम हो गया है, जिससे लोड संतुलित तरीके से डिवाइड हो सकेगा। स्थायी मरम्मत के बाद पुल की वास्तविक क्षमता को जांचने के लिए 160 टन का लोड टेस्ट भी किया जाएगा।
तीन महीने बंद रहेगा परिचालन
पथ निर्माण विभाग के मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने स्पष्ट किया है कि क्षतिग्रस्त हिस्सों के पूरी तरह पुनर्निर्माण के लिए पुल पर वाहनों का परिचालन 1 अक्टूबर से आगामी तीन महीनों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। सीमा सड़क संगठन की टीम द्वारा अस्थायी बेली ब्रिज को सुरक्षित हटाए जाने के बाद अब मुख्य हिस्से के 4 क्षतिग्रस्त स्पैन को काटकर अलग करने का काम चल रहा है।
यात्रियों के लिए नाव सेवा
यात्रियों की सहूलियत के लिए जिला प्रशासन ने गंगा नदी में विशेष जलमार्ग फेरी सेवा शुरू की है। इसके लिए बियाडा गंगा घाट को पैदल यात्रियों के लिए मुख्य टर्मिनल बनाया गया है, जबकि बाबूपुर गंगा घाट से केवल दोपहिया वाहनों और आवश्यक सामान के साथ मुसाफिरों को नदी पार करने की अनुमति दी गई है ताकि घाटों पर अनावश्यक भीड़ और मिक्सिंग न हो। जितेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने कहा है कि पुल के भीतरी पिलर संख्या 1 से 4 का ढांचा काफी कमजोर हो चुका था। मुंबई की विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा कार्बन प्लेटिंग की इस आधुनिक तकनीक के प्रयोग से लोड शेयरिंग बेहद मजबूत हो जाएगी। हमारा लक्ष्य तय समय-सीमा के भीतर पुनर्स्थापन का काम पूरा करना है ताकि जनता को सुरक्षित और सुगम सफर वापस मिल सके।