भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर पुल की उम्र बढ़ाने और वजन कम करने के लिए बड़े तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से पुराने आरसीसी रेलिंग और फुटपाथ को हटाकर हल्की स्टील की रेलिंग और फुटपाथ लगाए जा रहे हैं। इस काम को पटना की सुहाने प्रोजेक्ट कंपनी कर रही है, जो पुराने कंक्रीट हिस्सों को काट रही है। इस काम की देखरेख बिहार राज्य पुल निर्माण निगम कर रहा है और अब इसमें नई तकनीकी मशीनें भी आ गई हैं। 15 अक्टूबर 2026 तक दिल्ली की मंगलम फर्म भी इस काम से जुड़ गई है, जो नौगछिया साइड में 24 मीटर लंबे और 200 टन वजनी स्टील गर्डर को लगाने के लिए विशेष मशीनें लाई है। यह गर्डर खराब हो चुके हिस्सों को मजबूत करेगा और भारी गाड़ियों के आने-जाने की क्षमता को बढ़ाएगा। अभी दूसरे क्षतिग्रस्त स्लैब को काटने का काम पूरा होने वाला है और तीसरे स्लैब पर काम तेजी से चल रहा है। 31 दिसंबर की समय सीमा को पूरा करने के लिए मजदूर दिन-रात तीन शिफ्टों में काम कर रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट में कई एजेंसियां काम कर रही हैं। महाराष्ट्र की माटे एंड एसोसिएट्स ने शुरुआत में स्लैब काटने का काम संभाला था, जबकि उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निर्माण निगम (यूपी सेतु निगम) मूल डिजाइन के हिसाब से सलाह दे रहा है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने शुरुआती तकनीकी जांच और बेली ब्रिज हटाने में मदद की थी। सड़क निर्माण मंत्री कुमार शिलेंद्र ने बताया है कि अधिकारी और इंजीनियर सुरक्षित यातायात को बहाल करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं और यूपी सेतु निगम के मूल डिजाइन का पूरा पालन हो रहा है ताकि पुल के बाकी हिस्सों पर ज्यादा दबाव न पड़े।
यह जगह डॉल्फिन अभयारण्य क्षेत्र में आती है, इसलिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (इन्वाइ) इस पर नजर रख रहे हैं। किसी भी तरह के नुकसानदायक कंपन से बचने के लिए विस्फटकों का इस्तेमाल पूरी तरह मना है। इसके बजाय ठेकेदार हाइड्रोलिक शियर जाव्स, डायमंड वायर सॉ और धूल रोकने वाली आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सारा मलबा गंगा नदी से दूर बजरा (बार्ज) के जरिए हटाया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शुरुआती निर्देशों के बाद अक्टूबर में मुख्य निर्माण कार्य शुरू हुआ था और यह प्रोजेक्ट जनवरी 2027 तक पूरा होना है।