परिधि संस्था ने गंगा मुक्ति आंदोलन और बिहार प्रदेश मत्स्यजीवी जल श्रमिक संघ के साथ मिलकर कहलगांव के कागजी टोला में रविवार को विश्व नदी दिवस मनाया। इस कार्यक्रम में बातचीत और संकल्प कार्यक्रम हुआ जिसकी अध्यक्षता योगेंद्र सहनी ने की। मनोज सहनी ने नौगाछिया से आए युवाओं का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में करीब 50 लोग शामिल हुए जिनमें ज्यादातर युवा लड़के और लड़कियां थे।
- कहलगांव के कागजी टोला में मनाया गया विश्व नदी दिवस
- कार्यक्रम में लगभग 50 लोग हुए शामिल
- नदियों के अस्तित्व और उनकी सुरक्षा पर हुई चर्चा
परिधि के निदेशक उदय ने बताया कि नदियां सभ्यता, संस्कृति और जीवन का पालना हैं। उन्होंने कहा कि गंगा का बचना सिर्फ नदी का बचना नहीं है बल्कि यह हमारी संस्कृति और जीवन से जुड़ा है। उदय ने बताया कि बड़ी नदियां छोटी नदियों पर निर्भर हैं लेकिन करीब 80 प्रतिशत छोटी नदियां या तो खत्म हो चुकी हैं या खत्म होने वाली हैं।
बाध, बैराज, बांध, सड़क, रेलवे और चार लेन हाईवे जैसी चीजों पर चिंता जताते हुए उदय ने कहा कि इनसे नदियों का नेचुरल बहाव बदल रहा है। उन्होंने नदी को केवल बहता पानी नहीं बल्कि वेटलैंड, दियारा, झील और भूजल से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदूषण, क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग से नदियों, जलीय जीवों और पेड़-पौधों पर खतरा बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम में कुंज बिहारी, पवन, स्मिता, आदित्य, युक्ता, पल्लवी, रेशम, मुस्कान, अविनाश और रोहित समेत लगभग 50 लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में सूरज सहनी ने धन्यवाद दिया।